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“20 साल का हिसाब मांगने मैदान में उतरे राहुल, तेजस्वी बोले,अब बिहार में बदलाव तय है!

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मुजफ्फरपुर, 29 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन में शामिल नेताओं ने बुधवार को सकरा विधानसभा में विशाल जनसभा कर राज्य की राजनीति में नया तेज़ रुख दिखाया। कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहली बार बिहार के चुनाव प्रचार के मैदान में उतरे और महागठबंधन के सीएम प्रत्याशी तेजस्वी यादव के साथ संयुक्त रूप से लोगों को संबोधित किया।

रैली का माहौल:भीड़, बारिश और जोश

बारिश के बावजूद लोगों की भारी उपस्थिति ने रैली को जीवंत बनाया। स्वागत के दौरान राहुल गांधी ने जनता का हृदय से धन्यवाद किया और सवाल भी किया “आपका मूड कैसा है?” जिससे सभा में हल्की मुस्कान और जोश का माहौल बना। मंच पर महागठबंधन के कई अन्य नेता भी मौजूद थे, जिनमें मुकेश सहनी भी शामिल थे।

मुख्य आरोप “बिहारियों का भविष्य छिना जा रहा है”

राहुल गांधी ने अपने भाषण में बिहार के युवाओं की कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा देश के कई हिस्सों में अपनी मेहनत से शहरों और इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते हैं, दिल्ली, बेंगलूरु, मुंबई और यहां तक कि विदेशों में भी,पर अपने प्रदेश में उन्हें अवसर नहीं मिलते। राहुल ने यह भी ज़ोर देकर कहा कि कई युवाओं को लगता है कि बिहार में उनका भविष्य नहीं बन पा रहा है, और यही असल चुनौती है जिसका हल महागठबंधन देना चाहता है,उन्होंने सीधे तौर पर राज्य की मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा “पिछले 20 साल में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए क्या किया गया?”और कहा कि राज्य को ऐसे विकास की आवश्यकता है जहाँ आम आदमी को उसका हक मिले, न कि बड़े कारोबारियों को सस्ते दामों पर जमीनें दे दी जाएँ।

तेजस्वी का संदेश:पलायन समाप्त करना और हर परिवार को नौकरी

तेजस्वी यादव ने रैली में लोगों से अपने लिए एक अवसर मांगा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य पलायन रोकना, भ्रष्टाचार और अपराध को मिटाना और बिहार को देश में नंबर-1 बनाना है। तेजस्वी ने वादा किया कि उनकी सरकार बनने पर वे प्रत्येक ऐसे परिवार को सरकारी नौकरी दिलाने का कानून लाएँगे जिनके घर में अभी तक कोई सरकारी नौकरी नहीं है, और यह वादा वे जल्दी कानून बनाकर पूरा करेंगे।तेजस्वी ने अपने पिछले कार्यकालों की उपलब्धियों का हवाला देते हुए बताया कि 17 महीनों में पाँच लाख लोगों को रोजगार के अवसर दिलवाए गए थे और उन नियुक्तियों में पेपर लीक जैसी घटनाएँ नहीं हुईं,यह उनकी ईमानदारी का सबूत हैं, उनका दावा रहा।
सियासी दांव-पेच और संदेश

राहुल ने भाजपा पर भी हमला करते हुए कहा कि बिहार में ‘रिमोट कंट्रोल’ के ज़रिये कुछ लोग सत्ता चला रहे हैं और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने केंद्र सरकार से जातीय जनगणना कराने की मांग का जिक्र भी किया और कहा कि इससे देश की वास्तविक सामाजिक-आबादी का आंकलन होगा।रैली ने साफ संदेश दिया कि महागठबंधन अपना संघटन और राजनीतिक एकजुटता दिखाने को तैयार है,राहुल गांधी की मुजफ्फरपुर एंट्री इस रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है, ताकि केंद्र और राज्य के मुद्दों को जोड़कर मतदाताओं तक अपना एजेंडा पहुँचाया जा सके।

जनता की प्रतिक्रिया और चुनावी परिदृश्य

सभा में उपस्थित लोगों ने राहुल और तेजस्वी के संबोधन को उत्साहजनक मानते हुए तालियाँ और नारेबाज़ी की। नज़र आ रहा था कि महागठबंधन विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय को अपने अभियान के केंद्र में रखकर चुनावी लड़ाई लड़ेगा। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी दलों से कड़ी लड़ाई और विनिमय-बहस इस चुनावी चरण में तेज़ रहेगी।

निष्कर्ष — विकास की मांग और वादों की कसौटी

मुजफ्फरपुर रैली ने बिहार के युवाओं, पलायन और रोज़गार जैसे स्थायी मुद्दों को फिर से सामने रखा। राहुल गांधी ने बिहारियों की मेहनत और उनके हक़ की बात उठाई तो तेजस्वी ने हर घर में सरकारी नौकरी देने का बड़ा वादा किया — दोनों ने मिलकर यह संदेश दिया कि महागठबंधन विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। अब सवाल यह है कि अगले दिनों में ये वादे धरातल पर किस तरह से परखें जायेंगे और मतदाताओं पर इनका क्या असर होगा।

(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, मुजफ्फरपुर)

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