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“रोसड़ा को जिला बनाने की मांग फिर अधूरी,अमित शाह की सभा में छात्र नेता मिश्रा विश्व बारूद की गुहार रही बेअसर

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रोसड़ा, समस्तीपुर:केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के रोसड़ा आगमन से लोगों में जबरदस्त उत्साह था। पूरे अनुमंडल में यह उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से अधूरी मांग — “रोसड़ा को जिला का दर्जा” — पर आज बड़ी घोषणा होगी। लेकिन सभा खत्म होते-होते लोगों के चेहरे की चमक फीकी पड़ गई। उम्मीदों का वो पर्व मायूसी में बदल गया।

जिला दर्जे की आस में टकटकी लगाए रहा रोसड़ा

अमित शाह की सभा को लेकर इलाके में सुबह से ही जबरदस्त हलचल थी। भीड़ उम्मीद कर रही थी कि गृहमंत्री अपने भाषण में रोसड़ा को जिला घोषित करने की घोषणा करेंगे। मंच के सामने खड़े युवाओं और नागरिकों में चर्चा थी“आज कुछ बड़ा होने वाला है।लेकिन भाषण खत्म हुआ, जयकारे गूंजे, और “रोसड़ा जिला” शब्द तक नहीं आया।

छात्र नेता मिश्रा विश्व बारूद का विरोध ‘फिर छल गई उम्मीदें’

सभा के दौरान छात्र युवा नेता मिश्रा विश्व बारूद ने हाथ में बड़ा पोस्टर लेकर “रोसड़ा को जिला बनाओ” की मांग उठाई। उनकी यह अपील भीड़ का ध्यान खींच रही थी, लेकिन मंच से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
सभा समाप्त होने के बाद उन्होंने फेसबुक पर लिखा,रोसड़ा अनुमंडल में गृहमंत्री अमित शाह का प्रोग्राम था, उम्मीद थी कि जिला के विषय में कुछ घोषणा करेंगे। लेकिन दुर्भाग्यवश किसी प्रकार की घोषणा नहीं की गई।”उनकी इस पोस्ट के बाद स्थानीय युवाओं और नागरिकों में निराशा और नाराज़गी की लहर दौड़ गई।

लोगों में नाराज़गी — ‘हर बार वादा, लेकिन नतीजा शून्य’

रोसड़ा के लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से हर चुनाव में जिला दर्जे का सपना दिखाया जाता है, लेकिन हर बार वादे हवा हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि गृहमंत्री का आगमन उम्मीदों का नया अध्याय खोल सकता था, लेकिन एक बार फिर यह मुद्दा भाषणों की भीड़ में गुम हो गया।

जनभावना स्पष्ट — “रोसड़ा को उसका हक चाहिए”

स्थानीय समाजसेवी और शिक्षकों का कहना है कि रोसड़ा की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक भार के हिसाब से यह जिला बनने का पूरा हकदार है। उनका कहना है कि अब यह मांग केवल राजनीतिक नारा नहीं रही — यह जनभावना का प्रतीक बन चुकी है।
निष्कर्ष — ‘घोषणा नहीं, अब निर्णायक कदम चाहिए’

अमित शाह के दौरे ने जहां एक ओर एनडीए खेमे में चुनावी जोश भरने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर रोसड़ा की जनता के दिलों में अधूरी उम्मीदें और भी गहरी हो गईं।
जनता का साफ कहना है,हमें भाषण नहीं, अपना जिला चाहिए।”

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