:
Breaking News

समस्तीपुर करंट हादसा: आंधी के बाद गिरे तार से किसान की मौत, बिजली विभाग पर गंभीर सवाल

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

समस्तीपुर के ताजपुर क्षेत्र में आंधी के बाद टूटे बिजली तार की चपेट में आने से किसान की मौत। घटना ने बिजली विभाग और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

समस्तीपुर/आलम की खबर:बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक परिवार की जिंदगी उजाड़ दी, बल्कि बिजली व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आनंदपुर मोरवा वार्ड-10 में खेत में गिरे करंट वाले तार की चपेट में आने से 40 वर्षीय किसान रोशन कुमार की मौत हो गई, लेकिन यह महज एक हादसा है या सिस्टम की लापरवाही का नतीजा—यही सबसे बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात आई तेज आंधी और बारिश के दौरान खेत से गुजर रहा 220 वोल्ट का बिजली का तार टूटकर जमीन पर गिर गया था। यह कोई असामान्य घटना नहीं है—हर आंधी-बारिश के बाद कई जगहों पर तार टूटते हैं—लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग ने सुबह होने से पहले या उसके बाद ऐसे खतरनाक तारों की जांच की? क्या किसी ने यह सुनिश्चित किया कि खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए कोई खतरा न हो?

शुक्रवार की सुबह रोशन कुमार अपने खेत में परवल तोड़ने पहुंचे थे। वे रोज की तरह अपने काम में लगे थे, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि खेत में मौत उनका इंतजार कर रही है। जैसे ही वे टूटे हुए तार के संपर्क में आए, करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वे जमीन पर गिर पड़े और मदद के लिए आवाज लगाने लगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक मेहनतकश किसान, जो अपने परिवार का सहारा था, कुछ ही पलों में इस दुनिया से चला गया। पीछे रह गए उनके परिजन—पत्नी, एक बेटा और एक बेटी—जिनके सामने अब जीवन का सबसे कठिन दौर खड़ा है।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इस मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इसे सिर्फ एक ‘दुर्घटना’ कहकर फाइल बंद कर दी जाएगी, या फिर यह जांच होगी कि आंधी के बाद बिजली व्यवस्था की निगरानी क्यों नहीं की गई? अगर तार रात में ही टूट गया था, तो सुबह तक वह करंट के साथ जमीन पर कैसे पड़ा रहा?

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने अपनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और जांच शुरू कर दी है। थाना अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा ने कहा है कि प्रथम दृष्टया यह करंट से हुई मौत का मामला है और परिजनों को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी।

लेकिन क्या मुआवजा ही समाधान है? क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद कुछ लाख रुपये देकर जिम्मेदारी से बचा जा सकता है? यह सवाल अब सिर्फ रोशन कुमार के परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आंधी-बारिश के बाद बिजली के तारों की जांच शायद ही कभी समय पर होती है। कई बार घंटों तक, कभी-कभी दिनों तक टूटे तार खुले में पड़े रहते हैं, जो किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जो सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा को लेकर ठोस और सक्रिय व्यवस्था की जरूरत है। हर तूफान या तेज बारिश के बाद फील्ड निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर त्वरित सूचना और मरम्मत तंत्र को मजबूत करना होगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते खत्म किया जा सके।

रोशन कुमार की मौत एक चेतावनी है—अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे और हर बार एक नया परिवार बर्बाद होता रहेगा। सवाल यह है कि क्या इस बार प्रशासन इसे गंभीरता से लेगा, या फिर यह घटना भी आंकड़ों में सिमट कर रह जाएगी।

फिलहाल गांव में शोक का माहौल है, लेकिन इस शोक के साथ गुस्सा भी है—एक ऐसे सिस्टम के खिलाफ, जो अक्सर हादसे के बाद जागता है, पहले नहीं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *