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घोड़ासहन में साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा, 67 लाख नकदी बरामद, भारत-नेपाल सीमा पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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भारत-नेपाल सीमा से सटे घोड़ासहन में पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। छापेमारी में 67 लाख रुपये से अधिक नकदी बरामद हुई है और तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जांच जारी है।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। घोड़ासहन थाना क्षेत्र में की गई संयुक्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है और मौके से 67 लाख रुपये से अधिक नकदी बरामद की है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस जांच को और तेज कर दिया गया है।

यह कार्रवाई अचानक नहीं बल्कि एक पुख्ता सूचना के आधार पर की गई थी। जानकारी के अनुसार, साइबर डीएसपी अभिनव पाराशर को गुप्त सूचना मिली थी कि घोड़ासहन क्षेत्र में एक संगठित गिरोह लंबे समय से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा है। यह गिरोह न सिर्फ बिहार बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सक्रिय है और बड़े पैमाने पर लोगों को डिजिटल माध्यम से ठग रहा है।

सूचना मिलते ही डीएसपी ने तुरंत इसकी जानकारी जिले के एसपी स्वेन प्रभात को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तत्काल एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया। इस टीम में साइबर थाना, घोड़ासहन थाना और आसपास के अन्य थानों के पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया।

इसके बाद पुलिस ने पूरी योजना के तहत अलग-अलग संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई इतनी तेज और सटीक थी कि अपराधियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला।

छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिसकी कुल राशि 67 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। खास बात यह है कि बरामद नकदी में भारतीय मुद्रा के साथ-साथ नेपाली करेंसी भी शामिल है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल सीमा पार तक फैला हुआ हो सकता है।

पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान मौके से तीन संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है। इन सभी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। शुरुआती जांच में यह मामला एक संगठित साइबर अपराध गिरोह से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है, जो डिजिटल ठगी के जरिए बड़ी रकम इकट्ठा कर रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह कई तरह की साइबर ठगी में शामिल हो सकता है, जिसमें फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, बैंकिंग स्कैम और डिजिटल पेमेंट धोखाधड़ी जैसे तरीके शामिल हैं। फिलहाल सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

बरामद नकदी का स्रोत भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा किन-किन लोगों से ठगा गया और किस माध्यम से इसे एकत्र किया गया। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस पूरे मामले को साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय हो सकता है।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे साइबर ठगी से सावधान रहें। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र साइबर अपराधियों के लिए संवेदनशील इलाका बनता जा रहा है, क्योंकि यहां नेटवर्क सीमापार आसानी से फैल सकता है। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में साइबर अपराध पर अंकुश लगेगा। लोगों का कहना है कि इस तरह के गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकते हैं और अब जाकर उनका खुलासा हुआ है।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर इशारा कर सकती है।

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