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तेजस्वी का चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भड़कदार आरोप: “वोट खरीदने के लिए खातों में 10-10 हजार रु. डाले जा रहे हैं”

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पटना, 30 अक्तूबर: महागठबंधन के नेता और आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव ने गुरुवार को पटना में चुनावी माहौल पर सख्त हमला बोला और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार पर जम कर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के बीच लाखों महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये जमा कर के खुले तौर पर वोट खरीद रही है और चुनाव आयोग इस पर खामोश बैठा हुआ है।तेजस्वी ने कहा कि यह काम नई बात नहीं है — “24 तारीख को भी पैसे डाले गए थे और आज भी 10 लाख खातों में ये रकम जा रही है। चुनाव आयोग की नैतिकता कहाँ गई?” उनका कहना था कि दो दशक में जिन चीज़ों को वे करने में असमर्थ रहे, वही अब चुनाव के बीच ‘रिश्वत’ के रूप में किए जा रहे हैं।नीचे दिए गए उनके तानों में रंज हैं: “चुनाव के बीच 10-10 हजार रुपये खाते में डाले जा रहे हैं — ये स्पष्ट रूप से रिश्वत है। चुनाव आयोग चुप क्यों बैठा है? पूरा देश देख रहा है कि नैतिकता कहां चली गई। अगर बाद में ये उधार ही लिया गया पैसा सरकार ब्याज सहित वापिस लेगी, तो आखिर यह कैसे स्वीकार्य है?”
तेजस्वी ने सीधे तौर पर पूछा कि ऐसी कौन सी आपात स्थिति आ गई जो सरकार को यह स्वतंत्रता दे रही है कि वे चुनाव के बीच में इतनी बड़ी रकम बांट सकें। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से लोकतंत्र का अपमान है और जनता को इसके प्रति सजग रहना चाहिए।केंद्र और भाजपा को भी निशाने पर लेते हुए तेजस्वी ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व, खासकर अमित शाह के हालिया बयानों पर उनके तीखे विचार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बिहार से सिर्फ वोट ले कर जा रही है — “इन्हें केवल गुजरात में फैक्ट्री लगानी है, बिहार को वोट बैंक के रूप में चाहिए। बिहार की जनता इन्हیں सबक सिखाएगी।”ओवैसी के आवाहन पर आते हुए  जहाँ उन्हें मुस्लिम मतदाताओं से अलग राह अपनाने की बात कही जा रही है, तेजस्वी ने कहा कि उनका लक्ष्य राजनीति सांप्रदायिकता तक सीमित नहीं रखना। उन्होंने कहा, “हमारी कोई परवाह नहीं कि कोई क्या कह रहा है; हमारा फोकस बिहार को आगे लेकर जाना है। हम सब को हाथ जोड़ कर अपील करते हैं — यह मौका है बिहार को बदलने का। अगर NDA फिर सत्ता में आया तो बिहार पीछे चला जाएगा।तेजस्वी के इन तेवरों के बाद सियासी गलियारे गरमाने लगे हैं। राजनैतिक विरोधी शिविर पहले से ही पलटवार की तैयारी में हैं और चुनाव आयोग पर इनके लगाए गए आरोपों का राजनीतिक व्यावरिक असर चुनावी बहस में साफ दिखाई देगा।नोट: तेजस्वी के बयान ने चुनावी नैतिकता, सरकारी खर्च और केंद्र-राज्य संबंधों पर नई बहस खड़ी कर दी है,और अब यह मुद्दा मतदान से पहले राजनीतिक एजेंडे पर प्रमुख रूप से उभर कर सामने आएगा।

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