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बिहार में अंचलाधिकारियों की हड़ताल खत्म: 47 निलंबित CO बहाल, राजस्व कार्य फिर पटरी पर लौटे

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बिहार में अंचलाधिकारियों की लंबी हड़ताल खत्म हो गई है। सरकार ने 47 निलंबित CO को बहाल कर दिया है। इसके बाद राजस्व कार्यों के सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।

बिहार/आलम की खबर:बिहार में लंबे समय से चली आ रही अंचलाधिकारियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 47 निलंबित अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों को बहाल कर दिया है। इस निर्णय के बाद राज्य में राजस्व से जुड़े कामकाज के फिर से सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह मामला तब शुरू हुआ था जब बिहार राजस्व सेवा से जुड़े अंचलाधिकारी और अन्य अधिकारी 9 मार्च से सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। इस आंदोलन ने धीरे-धीरे प्रशासनिक व्यवस्था पर असर डालना शुरू कर दिया था, जिससे जमीन, राजस्व और प्रमाण पत्र से जुड़े कई काम रुक गए थे।

स्थिति बिगड़ने के बाद पूर्व सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए हड़ताल पर गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। एक ही दिन में बड़ी संख्या में अंचलाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। कुल मिलाकर इस अवधि में 47 राजस्व अधिकारियों और अंचलाधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी।

हड़ताल वापसी के बाद बदला फैसला

हालांकि नई सरकार के गठन के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला। 30 अप्रैल 2026 को हड़ताल पर गए अधिकारियों ने बिना शर्त काम पर लौटने की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने उनके रवैये और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया।

सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि चूंकि सभी 47 अधिकारी अब सेवा में लौटने को तैयार हैं, इसलिए प्रशासनिक हित और जनहित को देखते हुए उनके निलंबन को समाप्त किया जाता है। इस संबंध में 2 मई 2026 को एक संयुक्त आदेश जारी कर सभी अधिकारियों को बहाल करने का निर्णय लिया गया।

एक साथ जारी हुआ आदेश

विशेष बात यह रही कि पहले जहां अलग-अलग आदेशों के माध्यम से निलंबन की कार्रवाई की गई थी, वहीं अब एक ही संयुक्त आदेश के जरिए सभी 47 अधिकारियों को बहाल कर दिया गया है। यह आदेश प्रशासनिक एकरूपता और कार्यकुशलता को ध्यान में रखकर जारी किया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निलंबन मुक्त किए गए सभी अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के समाहर्ता (District Magistrate) के समक्ष योगदान देने का निर्देश दिया गया है, ताकि राजस्व कार्यों को तत्काल प्रभाव से सामान्य किया जा सके।

राजस्व कार्यों पर पड़ा था असर

इन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण राज्य में भूमि से जुड़े कार्य, दाखिल-खारिज, जाति और आवासीय प्रमाण पत्र, राजस्व वसूली और अन्य प्रशासनिक सेवाएं काफी प्रभावित हुई थीं। कई जिलों में आम जनता को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

अब सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि लंबित कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।

प्रशासनिक संतुलन की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सरकार द्वारा प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और कामकाज को सुचारू करने की दिशा में उठाया गया कदम है। एक ओर जहां अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी थी, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्था को भी चलाना आवश्यक था।

सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए और मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

अधिकारियों की वापसी से राहत

निलंबन समाप्त होने के बाद अधिकारियों की वापसी से प्रशासनिक मशीनरी में गति आने की उम्मीद है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां राजस्व सेवाओं की सबसे अधिक जरूरत होती है, वहां कामकाज तेजी से शुरू होने की संभावना है।

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