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मुज़फ़्फरपुर से हज़ार उम्मीदें,पर पीएम मोदी के भाषण ने बिहारवासियों को निराश किया

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मुज़फ़्फरपुर से रिपोर्ट:

बिहार की धरती पर गुरुवार (30 अक्टूबर, 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे — छठी मैया की जय-जयकार के साथ, तीखे तेवरों में आरजेडी और कांग्रेस पर निशाना साधा, लेकिन बिहार के मतदाता फिर वही पुराने सुर सुनकर निराश दिखे।प्रधानमंत्री ने कहा, “आपका ये बेटा छठी मैया की जय-जयकार दुनिया में कराने में लगा है, लेकिन कांग्रेस और आरजेडी के लोग छठी मैया का अपमान कर रहे हैं।” उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक भावनाओं के अपमान का आरोप लगाया और सवाल उठाया कि “क्या कोई वोट पाने के लिए छठी मैया का अपमान कर सकता है?”प्रधानमंत्री का पूरा भाषण छठ, सीता मइया और आस्था की बातों में डूबा रहा — मगर बिहार के लोगों के मन में सवाल गूंजता रहा: “विकास कहां है?”
बीस साल से बिहार में एनडीए की सरकार और ग्यारह साल से दिल्ली में मोदी सरकार — फिर भी न कोई कारखाना, न कोई उद्योग, न रोज़गार की बात! लोग कहते हैं, “हर बार वही पुराना राग — जंगलराज, लालू, और आस्था की राजनीति… पर पेट की राजनीति कौन करेगा?मुज़फ़्फरपुर के एक युवक ने कहा, “हमने सोचा था प्रधानमंत्री कुछ ठोस घोषणा करेंगे — कोई फैक्ट्री, कोई रोज़गार योजना… लेकिन वे फिर वही छठी मइया और सियासी तंज़ पर लौट गए।”उधर लखीसराय में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला, कहा कि “राहुल बाबा ने प्रधानमंत्री मोदी को अपमानित करते हुए छठी मइया का भी अपमान किया।” उन्होंने दावा किया कि “14 नवंबर को जब डब्बे खुलेंगे, महागठबंधन साफ़ हो जाएगा।”लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बिहार के मतदाता अब धर्म और आस्था से ज़्यादा रोज़गार, शिक्षा और उद्योग की राजनीति सुनना चाहते हैं। दो दशक के शासन के बाद भी अगर विकास की चर्चा मंच से गायब है, तो यह चिंता की बात है।छठी मइया की जय-जयकार अपनी जगह है, लेकिन बिहार की जनता अब चाहती है कि “जय बिहार के विकास” का नारा भी मंच से गूंजे।



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