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Bihar Politics: लालू परिवार को 10 सर्कुलर रोड आवास खाली करने का 15 दिन का अल्टीमेटम

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बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव परिवार को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जहां राज्य सरकार और राजद प्रमुख के परिवार के बीच आवास को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने लालू प्रसाद यादव के परिवार को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास को खाली करने के लिए 15 दिनों का नया अल्टीमेटम दिया है। इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब इस आवास को लेकर नोटिस जारी किया गया हो। इससे पहले 25 नवंबर 2025 को भी संबंधित विभाग की ओर से आवास खाली करने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि उस समय निर्धारित अवधि के भीतर आवास खाली नहीं किया गया। अब सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए नई समय सीमा तय की है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

पटना का 10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी आवास लंबे समय से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। इस आवास में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पति और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का निवास बताया जाता है। यही वजह है कि इस आवास को लेकर हर गतिविधि राजनीतिक मायनों में अहम हो जाती है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह आवास अब अन्य सरकारी उपयोग के लिए निर्धारित किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार, इसे बिहार विधान परिषद के सदस्यों के आवासन के लिए चिन्हित किया गया है। इसी कारण भवन निर्माण विभाग की ओर से इसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विभाग ने पहले भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।

बताया जा रहा है कि लगभग दो दशकों से अधिक समय से यह आवास लालू परिवार के पास है। ऐसे में अब इसे खाली कराने की प्रक्रिया ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष इस मुद्दे को अलग नजरिए से देख रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक निर्णय बता रही है।

हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने हलचल तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें सत्ता और विपक्ष दोनों के बड़े चेहरे जुड़े हुए हैं।

इस बीच यह भी चर्चा है कि सरकार ने वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी निर्धारित की है। बताया जा रहा है कि पटना के हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य सरकारी आवास को इस उद्देश्य के लिए चिन्हित किया गया है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार प्रशासनिक नियमों का हवाला दे रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव के रूप में देख सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले में क्या मोड़ आता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी आवासों के आवंटन और उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम होते हैं, जिनका पालन सभी को करना होता है। यदि किसी कारणवश आवास का पुनः आवंटन किया जाता है, तो संबंधित पक्ष को निर्धारित समय में उसे खाली करना होता है। ऐसे मामलों में अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है, खासकर जब मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो।

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लालू परिवार इस नए अल्टीमेटम के भीतर आवास खाली करेगा या फिर यह मामला कानूनी या राजनीतिक रूप से आगे बढ़ेगा। स्थिति चाहे जो भी हो, इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बिहार की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रहेगा।

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