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समस्तीपुर DM के जनता दरबार में पहुंचा दुबई जेल में बंद युवक का मामला, नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप, परिवार ने लगाई रिहाई की गुहार

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समस्तीपुर के युवक मो. उजाला के दुबई की फुजिरा जेल में बंद होने का मामला DM के जनता दरबार तक पहुंचा। परिवार ने नौकरी के नाम पर ठगी और साजिश का आरोप लगाते हुए रिहाई की मांग की।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। जिले के भागीरथपुर गांव निवासी 28 वर्षीय मो. उजाला, जो पिछले करीब आठ महीनों से दुबई के फुजिरा जेल में बंद हैं, उनके मामले को लेकर परिजन अब न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन पर ड्रग्स सप्लाई से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, लेकिन परिवार का दावा है कि उन्हें नौकरी के नाम पर झांसा देकर विदेश भेजा गया और साजिश के तहत फंसा दिया गया।मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब युवक की मां रिजवाना खातून और पत्नी रोजी परवीन समस्तीपुर के जिलाधिकारी Roshan Kushwaha के जनता दरबार में पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए मदद की गुहार लगाई। इस दौरान दोनों की आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ महसूस किया जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से अपने बेटे और पति को सुरक्षित वापस लाने की अपील की।

नौकरी का सपना और साजिश का आरोप

परिवार के अनुसार, मो. उजाला को एक एजेंट ने विदेश में बेहतर नौकरी का भरोसा दिलाया था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह एक बड़ा अवसर था, इसलिए बिना अधिक जांच-पड़ताल के उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उजाला दुबई पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचते ही हालात बदल गए।

कुछ समय बाद अचानक उस पर ड्रग्स सप्लाई से जुड़े आरोप लगा दिए गए और उसे गिरफ्तार कर फुजिरा जेल भेज दिया गया। परिवार का कहना है कि यह पूरी घटना एक साजिश का हिस्सा है और उजाला को फर्जी तरीके से इस मामले में फंसाया गया है।

आठ महीने से जेल में, टूट चुका है परिवार

पिछले आठ महीनों से उजाला जेल में बंद है और इस दौरान परिवार लगातार उसकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन आर्थिक तंगी और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव में उन्हें कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।

मां रिजवाना खातून ने बताया कि उनका बेटा मेहनत करने वाला सीधा-सादा युवक है और कभी किसी गलत काम में शामिल नहीं रहा। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उनके बेटे को झूठे आरोप में फंसाया गया है। पत्नी रोजी परवीन ने भी बताया कि छोटे बच्चों के साथ जीवन यापन करना बेहद कठिन हो गया है और परिवार गहरे संकट में है।

जनता दरबार से जगी उम्मीद

जिलाधिकारी के जनता दरबार में पहुंचने के बाद परिवार को अब उम्मीद जगी है कि उनके मामले में प्रशासनिक स्तर पर पहल होगी। जिलाधिकारी ने भी पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। माना जा रहा है कि संबंधित विभागों और विदेश मंत्रालय के माध्यम से इस दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं।

विदेश रोजगार के नाम पर ठगी का जाल

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक गरीब और बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी के नाम पर ठगा जाता रहेगा। बिहार सहित देश के कई राज्यों में ऐसे एजेंट सक्रिय हैं, जो युवाओं को सुनहरे सपने दिखाकर उन्हें जोखिम भरी परिस्थितियों में धकेल देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। लोगों को भी विदेश जाने से पहले सभी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी और सत्यापन करना चाहिए।

न्याय की उम्मीद में परिवार की निगाहें

फिलहाल पूरा परिवार प्रशासन और सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। उन्हें भरोसा है कि अगर समय रहते उचित कदम उठाए गए तो उजाला को न्याय मिल सकता है और वह अपने घर लौट सकेगा।

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