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विक्रमशिला सेतु हादसा: CM सम्राट चौधरी का हवाई सर्वे, 3 महीने में मरम्मत का अल्टीमेटम

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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गिरने के बाद बिहार सरकार एक्शन मोड में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हवाई सर्वे कर 3 महीने में मरम्मत पूरी करने का निर्देश दिया।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के अचानक क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो गई है। इस घटना ने जहां प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है, वहीं आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तत्काल हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर हर हाल में सेतु की मरम्मत पूरी कर इसे फिर से चालू किया जाए।

मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने ऊपर से पूरे पुल की स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मरम्मत कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुल लाखों लोगों की जीवनरेखा है, इसलिए इसकी बहाली में गुणवत्ता और समय सीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए।

हादसे के बाद ठप हुई रफ्तार, जनजीवन पर असर

रविवार की देर रात हुए इस हादसे में पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। यह सेतु भागलपुर को नवगछिया और उत्तर बिहार के कई जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इसके क्षतिग्रस्त होने के कारण हजारों लोगों की आवाजाही अचानक बाधित हो गई है। व्यापारिक गतिविधियां, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र और मरीजों की आवाजाही तक प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कारणों की जांच और तकनीकी विश्लेषण शुरू

घटना के तुरंत बाद पथ निर्माण विभाग ने विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेज दिया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पुल के गिरने के कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। इसके लिए तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, ताकि संरचनात्मक खामियों और अन्य संभावित कारणों का पता लगाया जा सके। सरकार का प्रयास है कि केवल मरम्मत ही नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को भी रोका जा सके।

बीआरओ को सौंपी गई जिम्मेदारी

मरम्मत कार्य को तेज और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन की टीम को भी लगाया गया है। कर्नल समर्थ गुप्ता के नेतृत्व में पहुंची टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण किया और स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की। निरीक्षण के दौरान टीम ने पुल के अंदरूनी हिस्सों का बारीकी से अध्ययन किया, जिससे मरम्मत कार्य के लिए सटीक रणनीति बनाई जा सके।

वैकल्पिक व्यवस्था से राहत देने की कोशिश

पुल के बंद होने के बाद प्रशासन ने आम लोगों को राहत देने के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था लागू कर दी है। बरारी घाट और बाबूपुर घाट से नवगछिया के महादेवपुर घाट तक नावों के माध्यम से लोगों को पार कराया जा रहा है। सरकारी स्तर पर चलाई जा रही नावों में यात्रा निशुल्क रखी गई है, जबकि निजी नावों के लिए तय किराया निर्धारित किया गया है ताकि लोगों से अधिक वसूली न हो।

सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान

मरम्मत कार्य के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। साथ ही, निर्माण कार्य के दौरान सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

तीन महीने में बहाली का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा किया जाए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और हर स्तर पर प्रगति की समीक्षा की जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि जल्द से जल्द पुल को फिर से चालू कर आम जनजीवन को सामान्य किया जाए।

विक्रमशिला सेतु क्षेत्र के लिए केवल एक पुल नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक जीवन का आधार है। ऐसे में इसकी शीघ्र बहाली सरकार की प्राथमिकता बन गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर मरम्मत कार्य पूरा होता है, तो यह प्रशासन की कार्यक्षमता और प्रतिबद्धता का बड़ा उदाहरण साबित होगा।

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