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बिहार पुलिस का बड़ा फैसला: महिला सहायता डेस्क अब बुजुर्गों और ट्रांसजेंडर की शिकायतें भी सुनेगी

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बिहार पुलिस ने महिला सहायता डेस्क का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह डेस्क महिलाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय की शिकायतों पर भी काम करेगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब राज्य के सभी थानों में संचालित महिला सहायता डेस्क का दायरा बढ़ा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत यह डेस्क केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े लोगों की शिकायतों को भी सुनेगी और उनके समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगी। इस फैसले को समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्गों तक पुलिस की पहुंच मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

इस नई व्यवस्था की जानकारी सरदार पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने दी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 855 थानों में पहले से ही महिला सहायता डेस्क काम कर रही है, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारियों का विस्तार करते हुए इसे और अधिक व्यापक बनाया गया है।

कमजोर वर्गों तक पहुंचेगी पुलिस की सीधी मदद

अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि समाज के कई वर्ग ऐसे हैं, जो अक्सर अपनी समस्याओं को लेकर थाने तक नहीं पहुंच पाते। विशेष रूप से बुजुर्ग और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग कई बार सामाजिक झिझक या भेदभाव के कारण अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पाते हैं। ऐसे में महिला सहायता डेस्क उनके लिए एक सुरक्षित मंच का काम करेगी, जहां वे बिना किसी डर या संकोच के अपनी बात रख सकेंगे।

एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को उचित मार्गदर्शन और त्वरित सहायता प्रदान करना भी है। इसके लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को संवेदनशील व्यवहार और बेहतर संवाद कौशल के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे हर वर्ग के लोगों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान कर सकें।

अभया ब्रिगेड से दिख रहा असर

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू की गई “अभया ब्रिगेड” योजना का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच इस यूनिट ने छेड़छाड़ और उत्पीड़न से जुड़े सैकड़ों मामलों में हस्तक्षेप किया है। कई मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारी भी की गई।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों, स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पुलिस की टीम नियमित रूप से गश्त कर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती है, जिससे अपराध की घटनाओं को रोका जा सके।

स्कूटी के जरिए और मजबूत होगी निगरानी

अभया ब्रिगेड को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 1500 नई स्कूटी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इन स्कूटियों के जरिए पुलिसकर्मी तेजी से भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों तक पहुंच सकेंगे। खासकर छात्राओं की सुरक्षा के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे समय पर हस्तक्षेप कर घटनाओं को रोका जा सकेगा।

अनुसूचित जाति-जनजाति मामलों में तेजी

बिहार पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया को भी तेज किया है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लंबित मामलों की संख्या में कमी आई है, जो यह दर्शाता है कि पुलिस अब इन मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाने की दिशा में काम कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों में देरी से पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा आती है, इसलिए विशेष मॉनिटरिंग के जरिए जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

मानव तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान

मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए बिहार पुलिस ने “नया सवेरा 2.0” अभियान चलाया। यह अभियान अप्रैल 2026 के पूरे महीने चला, जिसमें राज्यभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान कई मामलों की पहचान की गई और उन्हें जांच के दायरे में लाया गया।

इस अभियान का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि पीड़ितों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित जीवन की ओर वापस लाना भी है। पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह के अभियानों को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा।

तकनीकी रूप से भी मजबूत होगी व्यवस्था

बिहार पुलिस अब महिला सहायता डेस्क को तकनीकी रूप से भी सशक्त बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा और डिजिटल माध्यमों के जरिए शिकायतों की निगरानी की जाएगी। इससे पीड़ितों को त्वरित सहायता मिल सकेगी और मामलों के निपटारे में पारदर्शिता आएगी।

समावेशी पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम

पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बिहार पुलिस का यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे उन वर्गों को भी सुरक्षा और न्याय मिलने की उम्मीद है, जो अब तक खुद को व्यवस्था से दूर महसूस करते थे।

अधिकारियों का कहना है कि पुलिस का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सम्मान और सुरक्षा का भरोसा देना भी है। इसी सोच के तहत लगातार नई योजनाएं और सुधार लागू किए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, महिला सहायता डेस्क के दायरे का विस्तार बिहार में संवेदनशील और जनोन्मुख पुलिसिंग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की संभावना है।

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