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पटना में नया साइबर फ्रॉड अलर्ट: केवाईसी अपडेट के नाम पर APK फाइल भेजकर 12 लाख की ठगी, मोबाइल हैक कर बैंक अकाउंट खाली

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पटना में साइबर ठगों ने केवाईसी अपडेट के नाम पर APK फाइल भेजकर एक व्यक्ति से करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली। मोबाइल हैक कर बैंक अकाउंट से पैसे उड़ाए गए। जानिए पूरा मामला और बचाव के तरीके।

पटना में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद खतरनाक और तकनीकी तरीका अपनाकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अब ठग सीधे लोगों को फोन कॉल करके खुद को बैंक अधिकारी बताते हैं और “केवाईसी अपडेट” के नाम पर उन्हें जाल में फंसाया जा रहा है। इस नए तरीके में सबसे बड़ा खतरा एक APK फाइल है, जिसे इंस्टॉल करते ही मोबाइल पूरी तरह हैक हो जाता है और यूजर का बैंक अकाउंट अपराधियों के नियंत्रण में चला जाता है।

राजधानी पटना में सामने आए एक ताजा मामले ने पूरे सिस्टम को सतर्क कर दिया है। निजी फर्म संचालक धीरज कुमार को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खाते की केवाईसी तुरंत अपडेट करनी होगी, वरना खाता बंद हो सकता है। डर और भरोसे के बीच पीड़ित ने कॉल करने वाले की बातों पर यकीन कर लिया।

इसके बाद ठगों ने उन्हें एक APK फाइल भेजी और कहा कि इसे तुरंत इंस्टॉल करें, क्योंकि यह बैंक की ओर से जारी सुरक्षा अपडेट है। जैसे ही धीरज कुमार ने उस फाइल को अपने मोबाइल में डाउनलोड और इंस्टॉल किया, उनका फोन पूरी तरह हैक हो गया। फोन में मौजूद सभी डेटा, मैसेज, बैंक ऐप्स और ओटीपी तक ठगों की पहुंच में आ गए।

इसके बाद शुरू हुआ असली खेल। ठग लगातार कॉल करके पीड़ित को यह विश्वास दिलाते रहे कि उनके खाते की लिमिट बढ़ाई जा रही है और कुछ तकनीकी प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान बिना किसी शक के उनके बैंक खाते से कई ट्रांजेक्शन किए गए और धीरे-धीरे करीब 12 लाख रुपये निकाल लिए गए।

जब तक पीड़ित को कुछ समझ आता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अचानक मोबाइल और बैंक अलर्ट देखकर उन्हें शक हुआ। उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि उनके खाते से अनधिकृत ट्रांजेक्शन हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

इसी तरह का एक और मामला बेऊर इलाके से सामने आया है, जहां एक युवक को ट्रैफिक चालान के नाम पर APK फाइल भेजी गई। युवक ने बिना जांच किए फाइल डाउनलोड कर ली, जिसके बाद उसका मोबाइल भी हैक हो गया। इसके बाद उसके बैंक खाते से ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रांजेक्शन किए गए।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि APK फाइल के जरिए हैकर्स आपके मोबाइल में स्पाइवेयर या मालवेयर इंस्टॉल कर देते हैं, जिससे वे आपकी हर गतिविधि पर नजर रख सकते हैं। इसमें बैंकिंग ऐप, ओटीपी, कॉल रिकॉर्ड और मैसेज तक शामिल होते हैं। एक बार एक्सेस मिल जाने के बाद ठग आसानी से खाते को खाली कर देते हैं।

पुलिस और साइबर सेल ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या APK फाइल पर भरोसा न करें। बैंक कभी भी इस तरह से केवाईसी अपडेट नहीं करवाते हैं। किसी भी संदिग्ध लिंक या फाइल को तुरंत डिलीट करना ही सुरक्षित उपाय है।

आज के डिजिटल दौर में यह जरूरी हो गया है कि लोग साइबर जागरूकता अपनाएं, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

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