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चुनाव मैदान में बंद नेता की पत्नी का आरोप,पुलिस बना रही डर का माहौल, बच्चों तक को दी जा रही जेल की धमकी”

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पटना / दानापुर | 30 अक्टूबर 2025:बिहार की सियासत में हर दौर में कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है, लेकिन इस बार मामला कुछ ज़्यादा ही दिलचस्प और विवादित हो गया है। दानापुर से आरजेडी विधायक रीतलाल यादव, जो इस वक्त भागलपुर जेल में बंद हैं, चुनावी मैदान में भले न हों — मगर उनके नाम पर राजनीति और पुलिसिया कार्रवाई दोनों में गर्मी बराबर है।
विधायक की पत्नी रिंकू कुमारी ने गुरुवार को पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “उन्हें प्रचार करने से रोका जा रहा है, और पूरे परिवार को जेल में डालने की धमकी दी जा रही है।”

पुलिस आती है, कैमरा लगाओ तो डर फैलाती है”

रिंकू कुमारी ने कहा,मेरे घर पर रोज़ पुलिस आती है। कभी बिहार पुलिस, कभी केंद्रीय फोर्स। सीसीटीवी में सब रिकॉर्ड है। वे कहते हैं कि मैं धमकी देकर वोट मांग रही हूँ। मेरे छोटे बच्चों से पूछते हैं ‘18 साल के हो क्या? अगर हुए तो जेल में डाल देंगे।’उन्होंने कहा कि गांव के लोग अब डर में जी रहे हैं, बच्चों तक को धमकाया जा रहा है। “मेरा भाई भी जेल में है, उसके बच्चों को भी नहीं छोड़ा जा रहा।”

जनता मालिक है, फिर डर क्यों?”

रीतलाल यादव की पत्नी ने सवाल उठाया जब जनता मालिक है तो पुलिस क्यों डिस्टर्ब कर रही है? चुनाव लड़ना कोई गुनाह है क्या? लालू प्रसाद यादव ने हमारे पति पर भरोसा जताया है। वे सात महीने से जेल में हैं, लेकिन कानून का सम्मान कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रशासन का रवैया साफ़ बताता है कि सत्ताधारी पक्ष विपक्ष के प्रचार से डरा हुआ है।

कौन हैं रीतलाल यादव?

दानापुर से आरजेडी के मौजूदा विधायक रीतलाल यादव इस वक्त एक बिल्डर से रंगदारी मांगने के केस में जेल में बंद हैं। इसके बावजूद लालू यादव ने 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए उन पर दोबारा भरोसा जताया और टिकट दिया।दूसरी तरफ़ भाजपा ने रामकृपाल यादव को मैदान में उतारा है — जो खुद भी रीतलाल के पुराने प्रतिद्वंदी हैं। दोनों खेमों के बीच मुकाबला इस बार सिर्फ़ वोटों का नहीं, साख और सियासी पकड़ का भी है।

 दानापुर की जंग: जेल की सलाखों से लेकर जनता के दिल तक

दानापुर में चुनाव अब एक नया रूप ले चुका है,एक तरफ़ जेल में बंद नेता की पत्नी का संघर्ष,दूसरी तरफ़ सत्ता के संसाधनों का दबदबा।
और जनता के मन में सिर्फ़ एक सवाल गूंज रहा है,क्या बिहार में अब चुनाव प्रचार करना भी “जुर्म” बन गया है?

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