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किऊल नदी उफान पर: सूर्य नारायण घाट यज्ञ पर रोक, फिर भी श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर कर रहे नदी पार

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जमुई डैम से पानी छोड़े जाने के बाद किऊल नदी उफान पर है। प्रशासन ने सूर्य नारायण घाट पर यज्ञ पर रोक लगाई, लेकिन श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।

जमुई/आलम की खबर:जमुई डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद किऊल नदी अचानक उफान पर आ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए आसपास के इलाकों तक खतरा पैदा करने लगा है। इसी बीच प्रशासन ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए सूर्य नारायण घाट पर चल रहे यज्ञ कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। लेकिन प्रशासन की रोक के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं दिख रहा है और लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार कर पूजा स्थल तक पहुंच रहे हैं।जानकारी के अनुसार वैशाख महीने में आमतौर पर शांत रहने वाली किऊल नदी इस बार अचानक तेज बहाव में बदल गई है। शुक्रवार की दोपहर और देर रात जमुई डैम से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते नदी का बहाव इतना तेज हो गया कि सूर्य नारायण घाट तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह से जलमग्न और क्षतिग्रस्त हो गया। कच्चा रास्ता टूट जाने के कारण अब वहां से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सूर्य नारायण घाट पर चल रहे यज्ञ कार्यक्रम को रोकने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद स्थानीय प्रशासनिक टीम, पुलिस बल और अंचलाधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी गई। लोगों को नदी पार करने से रोकने के लिए लगातार माइकिंग भी की जा रही है।

इस मामले में अनुमंडलाधिकारी Prabhakar Kumar ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यज्ञ स्थल पर किसी भी तरह की भीड़ या धार्मिक गतिविधि को रोकने का आदेश दिया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। वहीं अंचलाधिकारी Ajay Rathore और स्थानीय थाना पुलिस भी मौके पर लगातार निगरानी कर रही है।हालांकि प्रशासन की सख्ती के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैरिकेडिंग को पार कर तेज बहाव वाली नदी में उतर रहे हैं। कई लोग पानी की तेज धार के बीच से पैदल ही नदी पार कर यज्ञ स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला है बल्कि बेहद खतरनाक भी माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि यह आस्था और भगवान सूर्य नारायण की परीक्षा है, जिसे वे अपनी श्रद्धा और विश्वास के बल पर पार कर रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा चमत्कार भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि जिस नदी में गर्मी के दिनों में पानी नहीं रहता था, वहां आज अचानक तेज बहाव आना किसी विशेष संकेत जैसा प्रतीत हो रहा है।

लेकिन दूसरी ओर प्रशासन लगातार लोगों को समझाने में जुटा है कि यह आस्था नहीं बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा कदम है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे नदी के तेज बहाव में न उतरें और सुरक्षित स्थान पर रहें। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि जमुई डैम से और पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है।स्थानीय थाना प्रभारी ने भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी व्यक्ति को नदी पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है।

स्थिति को देखते हुए पूरे क्षेत्र में तनाव और चिंता का माहौल है। एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था है, तो दूसरी ओर प्रशासन की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। यही कारण है कि लगातार समझाइश और सुरक्षा उपायों के बावजूद लोग अपनी श्रद्धा के चलते जोखिम उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक जलस्तर बढ़ने की वजह डैम से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी है। ऐसे में नदी का बहाव अगले कुछ घंटों तक और तेज रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचना का पालन करें।

फिलहाल किऊल नदी के आसपास स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। लेकिन आस्था और सुरक्षा के इस टकराव में स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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