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मोकामा मर्डर ने हिलाई बिहार की सियासत,अनंत और सूरजभान आमने-सामने

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बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोकामा में हुई जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। वोटिंग से कुछ दिन पहले हुए इस सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था और चुनावी निष्पक्षता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।इस केस में आरोपों के निशाने पर हैं जेडीयू के बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह, जिन पर दुलारचंद की हत्या में शामिल होने का इल्ज़ाम लगा है। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती — अनंत सिंह ने खुद पर लगे आरोपों को “बेहूदे और साजिश” बताते हुए सीधे आरजेडी नेता सूरजभान सिंह का नाम उछाल दिया।

सूरजभान का पलटवार

अनंत के आरोपों पर सूरजभान सिंह ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा,
कौन मेरा नाम ले रहा है और कौन नहीं — यह चुनाव आयोग को देखना चाहिए। मोकामा कांड की जांच ज़रूर होनी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र की हत्या हो रही है और पूरा देश देख रहा है।”सूरजभान ने इलेक्शन कमीशन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है।
जब एक विधानसभा क्षेत्र में 10-15 प्रत्याशी हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना क्या मुश्किल है? उम्मीदवारों की जान पर बन आती है और आयोग चुप रहता है — इससे देश की बदनामी होती है।”उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र कमेटी से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

 चुनाव से पहले सियासी संग्राम

अब मोकामा हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया — यह चुनावी अखाड़े का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। आरोप-प्रत्यारोप की आग में दोनों नेता झुलस रहे हैं, जबकि जनता यह सवाल पूछ रही है कि “जब उम्मीदवार ही सुरक्षित नहीं, तो वोटर किस पर भरोसा करे?”

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