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बेगूसराय में बिजली विभाग की लापरवाही, बीपीएल परिवार को लाखों का गलत बिल, जांच की मांग तेज

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बेगूसराय में एक बीपीएल परिवार को केवल दो बल्ब जलाने के बावजूद सवा दो लाख रुपये का बिजली बिल भेज दिया गया। पीड़ित परिवार लगातार विभाग के चक्कर लगा रहा है, लेकिन समाधान नहीं मिला।

बेगूसराय/आलम की खबर: बिहार के बेगूसराय जिले से बिजली विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने एक गरीब बीपीएल परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। छौड़ाही प्रखंड की सावंत पंचायत स्थित मोइन टोला वार्ड संख्या 16 में रहने वाले दीपक पासवान और उनका परिवार उस समय सदमे में आ गया जब उन्हें केवल दो बल्ब जलाने के बावजूद करीब सवा दो लाख रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया। छोटा सा घर और सीमित बिजली उपयोग के बावजूद इतना भारी बिल आना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।

दीपक पासवान बताते हैं कि उनका परिवार बेहद साधारण जीवन जीता है और घर में बिजली का उपयोग भी बेहद सीमित है। उनके अनुसार 3 दिसंबर 2016 को उन्होंने अंतिम बार 122 रुपये का बिल जमा किया था, लेकिन इसके बाद अचानक विभाग की ओर से 23 हजार रुपये से अधिक का बिल भेज दिया गया, जिससे परिवार परेशान हो गया। यही वह समय था जब उन्होंने बिजली विभाग से बार-बार संपर्क कर गलती सुधारने की मांग की, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

समस्या यहीं नहीं रुकी, बल्कि समय के साथ यह और बढ़ती चली गई। 2017 में उन्होंने लिखित आवेदन भी दिया और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन मामला फाइलों में ही दबा रह गया। नतीजा यह हुआ कि वर्षों बाद वही बिल बढ़ते-बढ़ते 18 अक्टूबर 2023 तक 1.45 लाख रुपये से भी अधिक पहुंच गया और बाद में जुर्माना जोड़कर यह राशि लगभग 2.25 लाख रुपये तक पहुंच गई।

इतनी बड़ी रकम देखकर परिवार पूरी तरह टूट गया है। दीपक पासवान का कहना है कि जिस घर में मुश्किल से दो बल्ब जलते हैं, वहां लाखों रुपये का बिल आना किसी तकनीकी गड़बड़ी या बड़ी लापरवाही को दिखाता है। उनका कहना है कि वे कई बार विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।

इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गलतियां गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं और कई बार वे बेवजह आर्थिक बोझ में दब जाते हैं। लोगों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जब इस पूरे मामले को लेकर बिजली विभाग के संबंधित अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल पीड़ित परिवार विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है और उन्हें उम्मीद है कि किसी दिन उनका बिल ठीक किया जाएगा।

यह पूरा मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि सिस्टम की छोटी-सी गलती भी गरीब और आम उपभोक्ताओं के लिए कितना बड़ा संकट बन सकती है।

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