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Bihar News: सारण में खुले सोखता टैंक में गिरने से दो चचेरी बहनों की मौत, गांव में पसरा मातम

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सारण के डेरनी थाना क्षेत्र में खुले सोखता टैंक में गिरने से दो मासूम चचेरी बहनों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

SARAN/आलम की खबर: बिहार के सारण जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। डेरनी थाना क्षेत्र के जितवारपुर महेशिया गांव में रविवार सुबह खेलते-खेलते दो मासूम चचेरी बहनों की जान चली गई। दोनों बच्चियां घर से लीची तोड़ने निकली थीं, लेकिन कुछ ही देर बाद खुले सोखता टैंक में गिरने से उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मृत बच्चियों की पहचान गांव निवासी दिनेश शर्मा की पांच वर्षीय पुत्री अनुष्का कुमारी और संजय शर्मा की छह वर्षीय पुत्री नेहा कुमारी के रूप में हुई है। दोनों बच्चियां आपस में चचेरी बहन थीं और हमेशा साथ-साथ खेला करती थीं। गांव के लोगों का कहना है कि दोनों के बीच बेहद गहरा लगाव था और शायद ही कभी कोई उन्हें अलग देखता था। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि रविवार की सुबह उनके परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख लेकर आएगी।

जानकारी के अनुसार रविवार सुबह दोनों बच्चियां घर के पास खेल रही थीं। इसी दौरान वे लीची तोड़ने के लिए गांव के समीप की ओर निकल गईं। उसी इलाके में एक सोखता टैंक बना हुआ था, जिसका ढक्कन खुला हुआ था। आसपास किसी प्रकार की सुरक्षा घेराबंदी नहीं की गई थी। खेलते-खेलते दोनों बच्चियां वहां पहुंच गईं और अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण खुले टैंक में गिर गईं।

काफी देर तक जब दोनों बच्चियां घर वापस नहीं लौटीं, तो परिवार के लोग परेशान हो गए। पहले आसपास के घरों और गलियों में खोजबीन की गई। धीरे-धीरे ग्रामीण भी तलाश में जुट गए। गांव के लोग अलग-अलग दिशाओं में बच्चियों को खोजने लगे। इसी दौरान कुछ लोगों की नजर खुले सोखता टैंक पर पड़ी। शक होने पर ग्रामीणों ने अंदर झांककर देखा तो दोनों बच्चियां उसमें गिरी हुई दिखाई दीं।

यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों के होश उड़ गए। ग्रामीणों ने आनन-फानन में दोनों बच्चियों को बाहर निकाला। उस समय तक दोनों अचेत हो चुकी थीं। इसके बाद परिवार और ग्रामीण उन्हें तुरंत इलाज के लिए परसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टरों के यह कहते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। बच्चियों की मां और परिवार के अन्य सदस्य बेसुध होकर रोने लगे। गांव से बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। हर किसी की आंखें नम थीं और पूरे माहौल में मातम पसरा हुआ था।

ग्रामीणों ने बताया कि अनुष्का और नेहा बेहद चंचल और मिलनसार स्वभाव की थीं। दोनों गांव में सभी की चहेती थीं। उनकी मासूम हरकतें और हंसी पूरे मोहल्ले में खुशियां बिखेरती थीं। लेकिन अब उसी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोगों का कहना है कि खेलते-कूदते घर से निकली दोनों बच्चियां कभी वापस नहीं लौटेंगी, यह सोचकर ही दिल कांप उठता है।

घटना के बाद गांव में लोगों का गुस्सा भी देखने को मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खुले सोखता टैंक लंबे समय से खतरा बने हुए हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती। लोगों का कहना है कि यदि टैंक को ढका गया होता या उसके आसपास सुरक्षा घेरा बना होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में बने खुले सोखता टैंक, गड्ढों और नालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर खुले गड्ढे और टैंक छोटे बच्चों के लिए मौत का कारण बनते जा रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते।

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। हालांकि परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और बच्चियों के शव को घर ले गए। पुलिस अधिकारियों ने भी परिजनों से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश की।

शाम होते-होते पूरा गांव गम में डूब गया। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गांव की गलियों में हर तरफ सिर्फ इसी हादसे की चर्चा होती रही। महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं और बच्चे भी डरे हुए दिखाई दिए। यह हादसा पूरे इलाके के लिए एक गहरी पीड़ा बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में खुले सोखता टैंक और बिना सुरक्षा वाले गड्ढे लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं। कई बार छोटे बच्चे खेलते-खेलते इनकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समय रहते सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।

यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव में ऐसे खुले टैंक और खतरनाक स्थानों की सूची बनाकर उन्हें सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।

फिलहाल जितवारपुर महेशिया गांव में मातम का माहौल है। दो मासूम बहनों की एक साथ हुई मौत ने पूरे गांव को अंदर तक झकझोर दिया है। हर कोई यही कह रहा है कि काश, वह सोखता टैंक खुला नहीं होता तो आज दोनों बच्चियां अपने घर में खेल रही होतीं।

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