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बिहार में बिल्डिंग बायलाज में बड़ा बदलाव, छोटे प्लॉट पर 70% तक कॉमर्शियल निर्माण की मंजूरी से शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार

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बिहार सरकार ने बिल्डिंग बायलाज में बड़ा संशोधन करते हुए छोटे भूखंडों पर 70% तक कॉमर्शियल निर्माण की अनुमति दी है। नए सेटबैक नियमों से व्यापारियों और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलेगी और शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य के शहरी विकास ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए बिल्डिंग बायलाज में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस फैसले को राज्य के रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक बड़ा राहत कदम माना जा रहा है। सरकार ने नए नियमों के तहत छोटे भूखंडों पर भी अब अधिकतम 70 प्रतिशत तक व्यावसायिक निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी है। इस निर्णय से न केवल निर्माण क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि शहरों में भूमि उपयोग को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, यह संशोधन पुराने बिहार बिल्डिंग बायलाज 2014 में किया गया है। पहले जहां व्यावसायिक निर्माण के लिए प्लॉट का सीमित उपयोग ही संभव था, वहीं अब नए प्रावधानों के तहत भूखंड का बड़ा हिस्सा निर्माण कार्य के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम स्तर के भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

Government of Bihar के इस फैसले को शहरी विकास नीति में एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में जमीन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। खासकर छोटे भूखंड मालिकों और स्थानीय व्यापारियों को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

नए नियमों के अनुसार, अब छोटे भूखंडों पर निर्माण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक लचीली हो गई है। 10 मीटर चौड़ाई तक के प्लॉट पर अगल-बगल खुली जगह छोड़ने की अनिवार्यता में ढील दी गई है, हालांकि भवन की अधिकतम ऊंचाई 10 मीटर तक सीमित रहेगी। इसका उद्देश्य घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करना है।

इसके अलावा, 10 से 15 मीटर चौड़ाई वाले भूखंड पर अब 1.8 मीटर, 15 से 21 मीटर तक के प्लॉट पर 2 मीटर, 21 से 27 मीटर तक के भूखंड पर 2.5 मीटर और 39 मीटर से अधिक चौड़े प्लॉट पर 4 मीटर तक खुली जगह छोड़ने का प्रावधान किया गया है। यह नई व्यवस्था निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सुरक्षा और संतुलित शहरी विकास को भी सुनिश्चित करने का प्रयास है।

सिर्फ साइड सेटबैक ही नहीं बल्कि आगे और पीछे छोड़ी जाने वाली खुली जगह के नियमों में भी राहत दी गई है। 10 मीटर गहराई वाले प्लॉट पर सामने 1.5 मीटर और पीछे 1 मीटर जगह पर्याप्त होगी। वहीं 33 मीटर से अधिक गहराई वाले भूखंडों के लिए सामने 6 मीटर और पीछे 4.5 मीटर तक की खुली जगह अनिवार्य की गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव सुरक्षा, वेंटिलेशन और रोशनी के मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है।

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन बिहार के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। छोटे भूखंडों पर अब बड़े व्यावसायिक भवन बनाना आसान होगा, जिससे बाजार, दुकानें और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स तेजी से विकसित हो सकेंगे। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

रियल एस्टेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि लंबे समय से छोटे प्लॉट मालिक इस तरह की छूट की मांग कर रहे थे। अब इस बदलाव से शहरी क्षेत्रों में खाली और सीमित भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। खासकर पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

Patna समेत राज्य के कई बड़े शहरों में छोटे भूखंडों पर व्यावसायिक भवनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह नया नियम निवेशकों और व्यापारियों दोनों के लिए अवसर लेकर आया है।

सरकार का यह भी मानना है कि नियंत्रित और सुव्यवस्थित निर्माण से शहरों की सुंदरता और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहतर भूमि उपयोग से ट्रैफिक और बाजार व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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