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पटना सचिवालय में शराब की बोतल मिलने से मचा हड़कंप, शराबबंदी पर उठे गंभीर सवाल, आरजेडी ने सरकार को घेरा

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पटना सचिवालय के विकास भवन में शराब की बोतल मिलने के बाद बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया है। आरजेडी ने शराबबंदी कानून को फेल बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर गर्म हो गई है। राजधानी पटना स्थित सचिवालय परिसर के विकास भवन में शराब की बोतल मिलने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वही स्थान है जहां से राज्य की बड़ी प्रशासनिक नीतियां तय होती हैं और सरकार के कई अहम विभाग कार्य करते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, विकास भवन के गेट नंबर 6 के पास स्थित एक अधिकारी के चेंबर के बाहर शराब की बोतल (टेट्रा पैक) मिलने से अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पूरे सचिवालय परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है, जिससे मामला और अधिक रहस्यमय और गंभीर बन गया है।

बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे राज्य सरकार की प्रमुख नीतियों में से एक माना जाता है। सरकार लगातार दावा करती रही है कि इस कानून के चलते राज्य में नशे की लत और शराब सेवन पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े करती रही हैं। इस बार मामला सीधे सचिवालय परिसर तक पहुंचने से सियासी हलचल तेज हो गई है।

इस घटना के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इसे सरकार की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि जब राज्य के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सचिवालय परिसर में शराब मिल रही है, तो फिर पूरे राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

शक्ति सिंह यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार को ड्राई स्टेट कहा जाता है, लेकिन जब सचिवालय तक शराब पहुंच जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास भवन में ही उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का कार्यालय स्थित है, और उसी परिसर में शराब की बोतल मिलना व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

विपक्ष का कहना है कि यह घटना केवल एक सामान्य मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि शराबबंदी कानून जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल हो चुका है। आरजेडी ने आरोप लगाया कि राज्य में अवैध शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर जारी है और प्रशासनिक तंत्र इस पर नियंत्रण रखने में असफल साबित हो रहा है।

इधर, सरकार की ओर से इस मामले पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

शराबबंदी को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में अवैध शराब बरामद होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। कभी ट्रक से भारी मात्रा में शराब पकड़ी जाती है तो कभी ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बनाने के ठिकानों पर छापेमारी होती है। लेकिन इस बार मामला प्रशासनिक भवन तक पहुंचने से स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी परिसरों में ही इस तरह की घटनाएं सामने आने लगें तो यह प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि कहीं न कहीं सिस्टम के भीतर ही खामियां मौजूद हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा में भी जोर-शोर से उठ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बना सकता है, खासकर तब जब चुनावी माहौल नजदीक हो।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या बिहार की शराबबंदी नीति वास्तव में अपने उद्देश्य में सफल रही है या यह केवल कागजों तक सीमित रह गई है। जनता के बीच भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन यह देखना अहम होगा कि इस घटना का वास्तविक सच सामने आता है या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह धीरे-धीरे शांत हो जाता है।

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