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NEET UG-2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा एक्शन, पावापुरी मेडिकल कॉलेज के कमरों में छापेमारी

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NEET UG-2026 पेपर लीक मामले में CBI ने बिहार के पावापुरी मेडिकल कॉलेज में बड़ी कार्रवाई की है। कमरा नंबर 503 और 110 समेत कई कमरों की तलाशी में सॉल्वर गैंग, 60 लाख की डील और लाखों रुपये कैश से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

नालंदा/आलम की खबर:देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG-2026 पेपर लीक मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच और तेज कर दी है। बिहार के नालंदा जिले स्थित पावापुरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सीबीआई की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई कमरों में घंटों छापेमारी की। जांच एजेंसी की इस कार्रवाई से मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे दिन अफरा-तफरी और हलचल का माहौल बना रहा। सीबीआई की टीम विशेष रूप से उन छात्रों और कमरों पर फोकस कर रही है, जिनका नाम कथित सॉल्वर गैंग और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़कर सामने आया है।

जानकारी के अनुसार सीबीआई की दो सदस्यीय टीम स्थानीय पुलिस के साथ पावापुरी मेडिकल कॉलेज पहुंची और सबसे पहले इंटर्न हॉस्टल में स्थित आरोपी छात्र उज्ज्वल कुमार उर्फ राजा बाबू के कमरे की जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि कमरा बंद था, जिसके कारण अधिकारियों को ड्रिल मशीन और कटर की मदद से ताला तोड़ना पड़ा। इसके बाद टीम ने करीब दो घंटे तक कमरे की बारीकी से तलाशी ली। कमरे में मौजूद दस्तावेजों, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़े आपत्तिजनक सामान की बरामदगी की पुष्टि नहीं की गई, लेकिन सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिले हैं।

सीबीआई की कार्रवाई केवल एक कमरे तक सीमित नहीं रही। टीम ने मेडिकल कॉलेज के टाइफार्ड कैंपस में स्थित कमरा नंबर 501, 502, 503 और 110 की भी गहन तलाशी ली। ये कमरे कथित रूप से अवधेश कुमार और अमन कुमार से जुड़े बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कमरा नंबर 503 में जांच एजेंसी सबसे ज्यादा देर तक मौजूद रही। यहां रखे गए कई दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच की तैयारी की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक पावापुरी मेडिकल कॉलेज का द्वितीय वर्ष का छात्र अवधेश कुमार इस पूरे नेटवर्क का अहम सदस्य माना जा रहा है। फिलहाल वह जेल में बंद है। वहीं उसका कथित सहयोगी उज्ज्वल कुमार उर्फ राजा बाबू फरार बताया जा रहा है। दोनों पर आरोप है कि वे मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल कराने के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूलते थे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए 50 से 60 लाख रुपये तक की डील की जाती थी।

पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब परीक्षा से ठीक एक दिन पहले नालंदा पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो वाहनों में सवार तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने जब उनसे पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। गिरफ्तार लोगों में अवधेश कुमार और उज्ज्वल का मौसेरा भाई अमन कुमार भी शामिल था। तलाशी के दौरान पुलिस ने करीब 2.95 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और मामले में चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार आरोपियों में सीतामढ़ी निवासी हर्ष राज, मुजफ्फरपुर के पंकज कुमार और मनोज कुमार के अलावा मोतिहारी निवासी अमन कुमार का नाम भी शामिल है। अब सीबीआई सभी सात आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र कहां से लीक हुआ, किन माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया और इस पूरे रैकेट में किन-किन राज्यों के लोग शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान सीबीआई टीम ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन, जूनियर डॉक्टरों और हॉस्टल स्टाफ से भी पूछताछ की। कॉलेज से जुड़े कई प्रशासनिक रिकॉर्ड और छात्रों की गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज खंगाले गए। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं कॉलेज परिसर का इस्तेमाल पेपर लीक नेटवर्क के संचालन के लिए तो नहीं किया जा रहा था। हालांकि देर शाम तक किसी नई गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विला कुमारी अवकाश पर थीं। उनकी अनुपस्थिति में अस्पताल अधीक्षक डॉ. जकी अनवर जमां पूरे समय जांच एजेंसी के साथ मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और एजेंसियों को हर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज के छात्रों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा। कई छात्र पूरे दिन हॉस्टल और कैंपस के आसपास जमा रहे।

NEET UG-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी है। लाखों छात्रों ने महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए। अब छात्रों और अभिभावकों की नजर सीबीआई जांच पर टिकी हुई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।

शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं की गई तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है। बिहार पहले भी कई भर्ती और परीक्षा घोटालों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आना बेहद गंभीर माना जा रहा है।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है और इसके तार कई अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं। फिलहाल सीबीआई की कार्रवाई ने पूरे शिक्षा तंत्र और मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।

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