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पटना के बाढ़ में जर्जर पुलिया धंसी, छह युवक मलबे में दबे; निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

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पटना के बाढ़ अनुमंडल स्थित बेलछी प्रखंड में जर्जर पुलिया अचानक धंस गई, जिससे छह युवक मलबे में दबकर घायल हो गए। घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में पुल और पुलियों की जर्जर हालत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भागलपुर के विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद अब राजधानी पटना से सटे बाढ़ अनुमंडल में एक और बड़ी घटना सामने आई है। बेलछी प्रखंड के सकसोहरा थाना क्षेत्र स्थित दल्लोचक गांव में गुरुवार सुबह एक पुरानी पुलिया अचानक धंस गई। हादसे के वक्त पुलिया पर बैठे छह युवक मलबे में दब गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी घायलों को बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना अंदौली दरवेशपुरा पंचायत के दल्लोचक गांव की बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में जल निकासी के लिए करीब 15 वर्ष पहले इस पुलिया का निर्माण कराया गया था। समय बीतने के साथ पुलिया की स्थिति लगातार खराब होती चली गई, लेकिन इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी और कई जगहों पर दरारें भी दिखाई देने लगी थीं।

बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह गांव के कुछ युवक पुलिया पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज हुई और पुलिया बीच से धंसकर दो हिस्सों में टूट गई। हादसा इतना अचानक हुआ कि युवकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे सीधे मलबे के नीचे दब गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई।

ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने बांस, रस्सी और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सभी घायलों को बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें तत्काल सकसोहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया।

घायलों की पहचान आर्यन कुमार, अभिमन्यु कुमार, पिंटू कुमार, सौरभ कुमार, गौरव कुमार समेत अन्य युवकों के रूप में हुई है। सभी की उम्र लगभग 18 से 20 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार हादसे में युवकों को चोटें आई हैं, लेकिन फिलहाल सभी खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। हालांकि कुछ युवकों को गंभीर चोट लगने के कारण बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की तैयारी भी की गई।

घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था और वर्षों तक उसकी देखरेख नहीं की गई। लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को पुलिया की खराब स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते पुलिया की मरम्मत कराई जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। स्थानीय लोगों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई पुल और पुलियां वर्षों पुरानी हो चुकी हैं, लेकिन उनकी स्थिति की नियमित जांच नहीं होती। यही वजह है कि आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।

घटना की सूचना मिलते ही सकसोहरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की जांच शुरू कर दी। थानाध्यक्ष ने बताया कि घायलों का इलाज कराया जा रहा है और तकनीकी स्तर पर यह पता लगाया जा रहा है कि पुलिया किस कारण से धंसी। प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है ताकि कोई और हादसा न हो।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में पुलों और पुलियों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। कुछ दिन पहले भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। करीब 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल के पिलर संख्या 133 के पास दो स्लैब के बीच दरार आने के बाद एक बड़ा हिस्सा नदी में गिर गया था। उस घटना के बाद पूरे राज्य में निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर बहस तेज हो गई थी।

विक्रमशिला सेतु मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला था। Tejashwi Yadav और Pappu Yadav समेत कई नेताओं ने सरकार और निर्माण एजेंसियों पर सवाल उठाए थे। वहीं मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने खुद हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया था और मरम्मत कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया था।

अब बाढ़ अनुमंडल में पुलिया धंसने की घटना ने एक बार फिर बिहार की आधारभूत संरचना को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में बड़ी संख्या में पुल और पुलियां पुरानी हो चुकी हैं। कई संरचनाएं अपनी तय आयु पूरी कर चुकी हैं, लेकिन समय पर उनका ऑडिट और रखरखाव नहीं हो पा रहा। ऐसे में छोटे-छोटे गांवों में बने पुल और पुलियां लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल नई परियोजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से बने ढांचों की नियमित जांच और मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां सड़क और पुलिया ही लोगों के आवागमन का मुख्य साधन होते हैं, वहां किसी भी ढांचे की खराब स्थिति बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में पुराने पुलों और पुलियों का सर्वे कराया जाए। साथ ही जिन संरचनाओं की स्थिति खराब है, उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। तकनीकी टीम से पुलिया की स्थिति का आकलन कराया जा रहा है और यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई थी। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिया के आसपास आवाजाही सीमित कर दी गई है।

कुल मिलाकर बाढ़ अनुमंडल में हुआ यह हादसा केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं, बल्कि बिहार में जर्जर हो चुकी आधारभूत संरचनाओं की गंभीर स्थिति को उजागर करने वाली घटना बन गया है। अब लोगों की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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