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नीट पेपर लीक पर रोहिणी आचार्य का केंद्र पर हमला, पीएम मोदी से पूछा- ‘चर्चा क्यों नहीं?’

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नीट परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामले को लेकर रोहिणी आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने युवाओं के भविष्य और लगातार हो रहे परीक्षा घोटालों को लेकर सवाल उठाए।

पटना/आलम की खबर:देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद जहां जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, वहीं विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर बना हुआ है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कई तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री “परीक्षा पर चर्चा” जैसे कार्यक्रम करते हैं, तब उन्हें पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर भी खुलकर बोलना चाहिए।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर चर्चा के लिए मुद्दे तलाशते रहते हैं, लेकिन जब देश के लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है, तब वे इस विषय पर चुप क्यों हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री पेपर लीक जैसे मामलों पर खुलकर चर्चा करने से क्यों बच रहे हैं।

रोहिणी ने अपने पोस्ट में कहा कि देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे युवाओं के बीच निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में अनेक बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक विवादों में घिरीं, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।

उन्होंने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री के लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” का भी जिक्र किया। रोहिणी आचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बात करते हैं तो उन्हें पेपर लीक के कारण लाखों युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे संकट पर भी चर्चा करनी चाहिए। उनका कहना था कि देश के युवा आज सबसे ज्यादा परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर चिंतित हैं और सरकार को उनकी चिंताओं का जवाब देना चाहिए।

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान के साथ एक पोस्टर भी साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाई गई थी। पोस्टर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए युवाओं की परेशानी को दर्शाने की कोशिश की गई। पोस्टर में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बार-बार सामने आ रहे परीक्षा विवादों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है।

दरअसल, NEET परीक्षा को लेकर इस बार देशभर में काफी विवाद देखने को मिला। परीक्षा परिणाम आने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और केंद्र सरकार ने जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं।

पेपर लीक के मुद्दे ने बिहार की राजनीति में भी खास जगह बना ली है। बिहार पहले भी कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में विपक्ष लगातार इस मुद्दे को युवाओं के भविष्य से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है क्योंकि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे करोड़ों छात्र इससे सीधे प्रभावित होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक की घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल नहीं उठातीं, बल्कि मेहनत करने वाले छात्रों के मनोबल को भी तोड़ देती हैं। वर्षों तक तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को जब परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह होने लगता है, तब उनके भीतर व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़ने लगता है। यही कारण है कि NEET विवाद को लेकर देशभर में छात्रों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की बड़ी विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से यह साबित होता है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में सरकार असफल रही है। वहीं सरकार और उसके समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है। छात्र संगठन, राजनीतिक दल और विभिन्न सामाजिक समूह परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठा रहे हैं। कई लोग राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और तकनीकी रूप से सुरक्षित परीक्षा तंत्र विकसित करने की जरूरत बता रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल, NEET पेपर लीक विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन चुका है। रोहिणी आचार्य के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।

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