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नालंदा में जमीन विवाद बना खूनी संघर्ष, दो बेटों पर मां की हत्या का आरोप

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नालंदा जिले के चंडी थाना क्षेत्र स्थित बदौरा गांव में जमीन और मकान विवाद के बीच एक महिला की हत्या कर दी गई। परिजनों ने मृतका के दो बेटों पर गला रेतकर हत्या करने का आरोप लगाया है।

नालंदा/आलम की खबर:बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने मां-बेटे के रिश्ते को लेकर समाज को झकझोर कर रख दिया है। चंडी थाना क्षेत्र के बदौरा गांव में जमीन और मकान विवाद के बीच एक वृद्ध महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात में मृतका के ही दो बेटों पर हत्या का आरोप लगा है। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

मृतका की पहचान जिलवी देवी के रूप में हुई है, जो स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद की पत्नी थीं। बताया जा रहा है कि पारिवारिक विवाद के कारण वे लंबे समय से अपने मायके पक्ष के लोगों के साथ रह रही थीं। उनका ससुराल भाषीन बिगहा गांव में बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार के भीतर जमीन और मकान के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता गया।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि मृतका के दो बेटों—रविशंकर कुमार और चंद्रभूषण कुमार—ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। परिवार के लोगों का कहना है कि दोनों बेटों और उनकी मां के बीच संपत्ति को लेकर अक्सर विवाद होता था। कई बार मामला कहासुनी और मारपीट तक भी पहुंच चुका था। ग्रामीणों के मुताबिक परिवार के भीतर तनाव की स्थिति लंबे समय से बनी हुई थी।

जानकारी के अनुसार, आरोपित बेटों में से एक पटना में वाहन चालक के रूप में काम करता है। गांव के लोगों का कहना है कि पारिवारिक संपत्ति को लेकर दोनों भाइयों और उनकी मां के बीच लगातार विवाद बढ़ता जा रहा था। कई लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश भी की, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

घटना को लेकर सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि मृतका ने पहले ही अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने स्थानीय थाना में आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की थी। महिला ने पुलिस को बताया था कि उनके बेटे कभी भी उनके साथ अनहोनी कर सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले भी उन पर हमला करने की कोशिश की गई थी और एक बार उन्होंने किसी तरह पड़ोसियों के घर में छिपकर अपनी जान बचाई थी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते पुलिस और प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया होता तो शायद इस दर्दनाक घटना को रोका जा सकता था। गांव के लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि महिला की आशंकाओं के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा और हस्तक्षेप नहीं किया गया।

शनिवार को हुई इस वारदात के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। मृतका के परिजन और स्थानीय लोग आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच हल्की झड़प जैसी स्थिति भी बनी। हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई। पुलिस ने लोगों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसा मामला नहीं देखा, जहां संपत्ति विवाद इस हद तक पहुंच जाए कि बेटे अपनी ही मां के खून के प्यासे बन जाएं। लोग इस घटना को समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और रिश्तों में गिरते विश्वास का खतरनाक संकेत मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार समेत देश के कई हिस्सों में जमीन और संपत्ति विवाद पारिवारिक हिंसा की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। छोटी-छोटी बातों से शुरू होने वाले विवाद समय के साथ गंभीर अपराध का रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते सामाजिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप बेहद जरूरी माना जाता है।

कानून के जानकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले से खतरे की शिकायत दर्ज कराई हो और उसके बावजूद ऐसी घटना हो जाए, तो जांच एजेंसियां इस पहलू को भी गंभीरता से देखती हैं। मामले में पुलिस की भूमिका और पूर्व शिकायतों की स्थिति भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। दोनों आरोपित बेटों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप और रिश्तों में बढ़ती कटुता का भी गंभीर उदाहरण बन गई है। जिस मां ने अपने बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी पर हत्या जैसे आरोप लगना लोगों को भीतर तक झकझोर रहा है। गांव में अब भी दहशत और गम का माहौल बना हुआ है।

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