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Bihar News: मुजफ्फरपुर और किशनगंज में लगेगी डालमिया-अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री, 2484 करोड़ निवेश से बदलेगी औद्योगिक तस्वीर

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बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया और अंबुजा सीमेंट इकाइयों की स्थापना को मंजूरी दे दी है। SIPB बैठक में 2484 करोड़ रुपये की 16 औद्योगिक परियोजनाओं को स्वीकृति मिली, जिससे रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया तथा अंबुजा समूह की सीमेंट इकाइयों की स्थापना को मंजूरी मिलने के बाद राज्य में निवेश और रोजगार को लेकर नई उम्मीद जगी है। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं बैठक में हजारों करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिसमें सीमेंट उद्योग से जुड़े कई बड़े प्रस्ताव शामिल रहे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से बिहार में औद्योगिक आधार मजबूत होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे।

राज्य सरकार लंबे समय से बिहार को औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में अब बड़े कॉरपोरेट समूहों का निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार निवेश प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी देने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।SIPB की बैठक में कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी

राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े निवेश प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने कुल 2484.06 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस प्रदान किया, जबकि 46.86 करोड़ रुपये की चार परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति दी गई।

अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं बल्कि बिहार में औद्योगिक वातावरण को मजबूत करना भी है। सरकार चाहती है कि राज्य में बड़े निवेशक आगे आएं और उत्पादन इकाइयों की स्थापना कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दें। बैठक के दौरान निवेश प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने पर भी जोर दिया गया।

मुजफ्फरपुर में अंबुजा की बड़ी परियोजना

मुजफ्फरपुर जिले के महवल औद्योगिक क्षेत्र में अंबुजा कॉन्क्रीट नॉर्थ प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी सीमेंट इकाई स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में 1114.94 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। कंपनी यहां 8219 MTPD क्षमता की सीमेंट इकाई स्थापित करेगी।

औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर बिहार के औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सीमेंट उद्योग से जुड़े सहायक कारोबार जैसे परिवहन, निर्माण सामग्री, गोदाम और छोटे उद्योगों को भी इससे लाभ मिलने की संभावना है। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

डालमिया समूह का भी बड़ा निवेश

महवल औद्योगिक क्षेत्र में ही डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को भी सीमेंट इकाई लगाने की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 573.15 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कंपनी यहां 2.5 MTPD क्षमता की यूनिट स्थापित करेगी।

इसके अलावा किशनगंज में डालमिया सीमेंट (नॉर्थ ईस्ट) लिमिटेड को भी बड़ी परियोजना की मंजूरी दी गई है। लगभग 573.76 करोड़ रुपये के निवेश से वहां 2.5 MMTPA क्षमता की सीमेंट इकाई स्थापित की जाएगी। सीमांचल क्षेत्र में इस तरह की औद्योगिक परियोजना को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किशनगंज जैसे इलाके में बड़े उद्योगों के आने से स्थानीय व्यापार, सड़क संपर्क, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी विकास होगा। इससे आसपास के जिलों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। निर्माण कार्य से लेकर उत्पादन, परिवहन, सुरक्षा, तकनीकी सेवाओं और सप्लाई चेन तक कई क्षेत्रों में नौकरियों की संभावना बढ़ेगी।

बिहार लंबे समय से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहा है। ऐसे में राज्य में बड़े उद्योगों की स्थापना को रोजगार संकट कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि उद्योगों का यह सिलसिला लगातार जारी रहता है तो बिहार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।

अन्य निवेश प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

बैठक में केवल सीमेंट उद्योग ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों से जुड़े निवेश प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। इनमें केएनएसजी एल्मुनियम प्राइवेट लिमिटेड, एस राजदेव बिल्डज एलएलपी, आइकॉन स्पाइरल इलेक्ट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, सीता एग्रो फूड प्रोडक्ट और एसएपीएल इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड जैसे कई प्रस्ताव शामिल रहे।

सरकार की कोशिश है कि बिहार में केवल एक क्षेत्र पर निर्भरता न रहे बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, एग्रो फूड, निर्माण सामग्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूत किया जाए। इससे राज्य में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

डबल इंजन सरकार के दावे को मजबूती

राज्य सरकार इस निवेश को ‘डबल इंजन सरकार’ की औद्योगिक नीति की सफलता के रूप में पेश कर रही है। सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय के कारण बिहार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में उद्योग नीति में सुधार, भूमि उपलब्धता, बिजली आपूर्ति और निवेश मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में और भी कई बड़े निवेश प्रस्ताव राज्य में आने की संभावना है। इसके लिए निवेशकों के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है।

औद्योगिक पहचान की ओर बढ़ता बिहार

एक समय कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाले बिहार में अब उद्योगों की नई तस्वीर उभरती दिखाई दे रही है। सरकार चाहती है कि राज्य केवल श्रमिक आपूर्ति करने वाला प्रदेश न रहकर उत्पादन और निवेश का केंद्र भी बने।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं तो इससे बिहार की औद्योगिक छवि में बड़ा बदलाव आएगा। खासकर उत्तर बिहार और सीमांचल जैसे क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना से क्षेत्रीय असंतुलन भी कम हो सकता है।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि बड़े कॉरपोरेट निवेश से बिहार में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, व्यापार बढ़ेगा और युवाओं को अपने राज्य में ही रोजगार के अवसर मिलने लगेंगे। आने वाले वर्षों में यह निवेश बिहार की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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