:
Breaking News

सम्राट चौधरी सरकार के पहले महीने में 7 बड़े फैसले: बिहार में विकास, शिक्षा और सुशासन की नई रफ्तार

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार ने पहले महीने में 7 बड़े फैसले लेकर शहरी विकास, शिक्षा सुधार, महिला सुरक्षा और डिजिटल प्रशासन को नई दिशा दी है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने पहले ही महीने में जिस तरह से तेज और निर्णायक फैसले लिए हैं, उसने पूरे प्रशासनिक ढांचे और विकास नीति की दिशा को नया मोड़ दे दिया है। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सरकार ने जिस आक्रामक कार्यशैली के साथ काम शुरू किया, उसे राजनीतिक हलकों में “रफ्तार वाली सरकार” के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि उसका लक्ष्य केवल घोषणाएं नहीं बल्कि जमीनी बदलाव है, जिसे “न्याय के साथ विकास” की नीति के तहत लागू किया जा रहा है।

पहला बड़ा फैसला शहरी विकास से जुड़ा है, जिसके तहत राज्य के 10 जिलों में 11 आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की योजना शुरू की गई है। इन टाउनशिप को पूरी तरह योजनाबद्ध ढंग से विकसित किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, आवासीय कॉलोनियां, बाजार, पार्क और सामाजिक सुविधाएं एक ही ढांचे में होंगी। सरकार का मानना है कि इससे बड़े शहरों पर बढ़ता दबाव कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सासाराम जैसे ऐतिहासिक शहरों को भी इस योजना में शामिल करने पर विचार चल रहा है।

दूसरा अहम फैसला महिला सुरक्षा से जुड़ा है, जिसे “पुलिस दीदी योजना” नाम दिया गया है। इस योजना के तहत 1500 स्कूटी पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। ये पुलिसकर्मी स्कूल, कॉलेज और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार गश्त करेंगी। सरकार का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना है, ताकि छेड़खानी और सड़क अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।

तीसरा बड़ा सुधार प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए “सहयोग की त्रिवेणी” योजना के रूप में सामने आया है। इसमें हेल्पलाइन नंबर 1100, ऑनलाइन पोर्टल और पंचायत स्तर पर शिकायत निवारण शिविर शामिल किए गए हैं। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित इन शिविरों में जनता सीधे अधिकारियों से अपनी समस्याएं रख सकेगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

चौथा बड़ा फैसला शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर है। राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल उच्च माध्यमिक विद्यालय विकसित किया जाएगा। इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच मजबूत होगी। इस कदम से हजारों नए शिक्षण और प्रशासनिक पदों के सृजन का रास्ता भी खुलेगा।

पांचवां फैसला निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए लिया गया है। अब सभी निजी विद्यालयों को फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी। किताब और यूनिफॉर्म खरीदने की स्वतंत्रता अभिभावकों को दी जाएगी। किसी भी छात्र को फीस बकाया होने पर परीक्षा या परिणाम से वंचित नहीं किया जा सकेगा। यह निर्णय मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

छठा बड़ा फैसला स्थानीय रोजगार और संवेदकों को बढ़ावा देने के लिए है। बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन करते हुए यह तय किया गया है कि 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी निर्माण कार्यों में बिहार के स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे राज्य के छोटे व्यवसायों और युवाओं को सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे।

सातवां महत्वपूर्ण सुधार डिजिटल प्रशासन से जुड़ा है। ई-निबंधन प्रणाली को पूरी तरह लागू करते हुए जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पेपरलेस बना दिया गया है। अब रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी। साथ ही 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे रजिस्ट्री सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

इन सभी फैसलों के साथ सरकार ने कानून-व्यवस्था पर भी सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। पुलिस को तेज कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पहले महीने के इन फैसलों ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *