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ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ मुजफ्फरपुर में 24 घंटे की हड़ताल, आज बंद रहेंगी अधिकांश मेडिकल दुकानें

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मुजफ्फरपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। आज आधी रात से जिले की अधिकांश दवा दुकानें बंद रहेंगी।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर: बिहार के Muzaffarpur में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ दवा विक्रेताओं ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। जिले के खुदरा और थोक दवा दुकानदारों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है, जिसके तहत मंगलवार की मध्य रात्रि से बुधवार की मध्य रात्रि तक अधिकांश मेडिकल दुकानें बंद रहेंगी। इस फैसले के बाद आम लोगों के बीच दवाओं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है, हालांकि आपातकालीन सेवाओं के लिए कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर खुले रखने का निर्णय लिया गया है।

यह हड़ताल देशभर में चल रहे उस विरोध अभियान का हिस्सा है, जिसमें दवा विक्रेता ऑनलाइन दवा कंपनियों के कारोबार के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह आंदोलन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर के दवा विक्रेताओं का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल दुकानदारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट और आकर्षक ऑफर देकर ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही हैं। इससे स्थानीय मेडिकल दुकानों की बिक्री लगातार प्रभावित हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि पारंपरिक मेडिकल स्टोर लंबे समय से मरीजों को भरोसेमंद सेवा देते आ रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन कंपनियों की आक्रामक रणनीति के कारण उनका कारोबार कमजोर पड़ता जा रहा है।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, मुजफ्फरपुर के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा गंभीर विषय है। उनका आरोप है कि कई ई-फार्मेसी कंपनियां बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रही हैं। इससे गलत दवा के इस्तेमाल और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि कई दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार दवाओं की उपलब्धता और बिक्री की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित नहीं दिखती। इससे नकली, एक्सपायर्ड और प्रतिबंधित दवाओं के बाजार में पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है।

दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी कंपनियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर दवाएं बेच रही हैं। छोटे दुकानदारों का कहना है कि वे इतने कम मार्जिन पर कारोबार नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें दुकान किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में ऑनलाइन कंपनियों की प्रतिस्पर्धा उनके लिए मुश्किल बनती जा रही है।

मुजफ्फरपुर में इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पिछले तीन दिनों से दवा विक्रेता काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद अब पूर्ण बंदी का निर्णय लिया गया है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

हालांकि दवा विक्रेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए कुछ मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे। खासकर इमरजेंसी सेवाओं, अस्पतालों और गंभीर मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं बल्कि अपनी समस्याओं की ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के फायदे और नुकसान दोनों हैं। एक ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को घर बैठे दवा उपलब्ध हो जाती है, वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित बिक्री और फर्जी दवाओं का खतरा भी बना रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस क्षेत्र के लिए स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने चाहिए ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और छोटे दुकानदारों के हित भी सुरक्षित रहें।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि डिजिटल बाजार के विस्तार के साथ पारंपरिक कारोबारों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र जैसे संवेदनशील सेक्टर में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि स्थानीय मेडिकल दुकानें कमजोर होती हैं तो ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में दवा उपलब्धता की समस्या बढ़ सकती है, क्योंकि वहां अभी भी लोग स्थानीय दुकानों पर ही अधिक निर्भर हैं।

मुजफ्फरपुर के कई मरीजों और आम लोगों ने भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय दी है। कुछ लोगों का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं पर मिलने वाली छूट आम लोगों के लिए राहत देती है, जबकि कई लोगों का मानना है कि मेडिकल दुकानों की सलाह और तत्काल उपलब्धता का विकल्प ऑनलाइन सेवा पूरी तरह नहीं बन सकती।

फिलहाल जिले में 24 घंटे की हड़ताल को लेकर प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कोशिश है कि आपातकालीन सेवाओं पर इसका अधिक असर न पड़े। लोगों से भी अपील की गई है कि वे आवश्यक दवाओं की जरूरत होने पर पहले से तैयारी कर लें और केवल जरूरत पड़ने पर ही मेडिकल स्टोर का रुख करें।

यह आंदोलन केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देशभर में तेजी से बदलते दवा कारोबार और डिजिटल बाजार के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर क्या नीति अपनाती है और दवा विक्रेताओं की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।

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