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बिहार नगर निकाय चुनाव पर संकट गहराया: 7 निकायों में प्रशासक नियुक्त, चुनाव टलने के संकेत तेज

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बिहार में नगर निकाय चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। सरकार ने मधुबन, जम्होर और मदनपुर समेत 7 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए हैं, जिससे चुनाव में देरी के संकेत मिल रहे हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार में नगर निकाय चुनाव को लेकर चल रही अनिश्चितता अब और गहरी होती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा लगातार कई नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति किए जाने के बाद यह संकेत मजबूत हो गया है कि निकाय चुनाव फिलहाल टल सकते हैं या इनमें लंबी देरी हो सकती है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने हाल ही में पूर्वी चंपारण के मधुबन, औरंगाबाद जिले के जम्होर और मदनपुर नगर पंचायतों में प्रशासक तैनात करने की अधिसूचना जारी की है। इन सभी स्थानों पर संबंधित कार्यपालक पदाधिकारियों को ही प्रशासक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था अस्थायी रूप से उनके नियंत्रण में आ गई है।

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में नगर निकायों में इस तरह की व्यवस्था लागू की गई हो। इससे पहले भी दानापुर निजामत, सोनपुर, फुलवारीशरीफ और खगौल नगर परिषदों में प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। लगातार बढ़ती प्रशासक नियुक्तियों की सूची ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राज्य में नगर निकाय चुनावों की वास्तविक स्थिति क्या है और इन्हें कब कराया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, मधुबन, जम्होर और मदनपुर को पिछले विधानसभा चुनाव से पहले नगर पंचायत का दर्जा दिया गया था। इसी तरह सारण जिले के सोनपुर को नगर पंचायत से नगर परिषद में अपग्रेड किया गया था, जबकि पटना जिले के दानापुर निजामत, फुलवारीशरीफ और खगौल में नगर परिषदों का क्षेत्र विस्तार किया गया था। नियमों के मुताबिक, किसी भी नए नगर निकाय के गठन या सीमा विस्तार के छह महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, ताकि स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था सुचारू रूप से स्थापित हो सके।

बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 के प्रावधानों के अनुसार यदि निर्धारित समय सीमा में चुनाव नहीं कराए जाते हैं, तो संबंधित निकाय स्वतः भंग मान लिए जाते हैं और वहां प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए सरकार प्रशासक नियुक्त करती है। मौजूदा स्थिति में इन सातों निकायों में छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसी कारण सरकार ने अब प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति को आगे बढ़ा दिया है।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्षी दल इसे चुनाव टालने की रणनीति बता रहे हैं और सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं सरकार का पक्ष है कि सभी कदम कानून और नियमों के तहत उठाए जा रहे हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्राथमिकता है। हालांकि, चुनाव को लेकर स्पष्ट समय सीमा अब तक सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित बनी हुई है।

इधर दूसरी ओर, सरकार ने नगर निकायों की सशक्त स्थायी समितियों के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नई तारीखों की घोषणा कर दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 26 मई से 31 मई के बीच राज्य के सभी नगर निकायों में स्थायी समिति के चुनाव पूरे किए जाएं। विभागीय मंत्री नितिन नवीन (सूत्रानुसार/प्रक्रिया अनुसार) ने निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराई जाए।

राज्य के कुल 264 नगर निकायों में यह चुनाव लंबित चल रहे हैं, जिन्हें अब निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले अप्रैल में भी इस प्रक्रिया की शुरुआत की गई थी, लेकिन कुछ प्रशासनिक कारणों से इसे रोक दिया गया था। हालांकि जिन निकायों में 15 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, वहां पहले से गठित समितियां अपना कार्य जारी रखेंगी।

अब सरकार द्वारा दोबारा प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद जिलों में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां स्थायी समिति चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निकाय आम चुनाव की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में राज्य में स्थानीय निकायों की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर असमंजस का माहौल बना हुआ है।

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