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समस्तीपुर पूसा में नकली डीएपी खाद मिलने का आरोप, किसानों में हड़कंप, सैंपल जांच के लिए भेजा गया

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समस्तीपुर के पूसा क्षेत्र में नकली डीएपी खाद मिलने के आरोप से किसानों में भारी नाराजगी है। कृषि विभाग ने सैंपल जब्त कर जांच के लिए लैब भेज दिया है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के पूसा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहम्मदपुर कोआरी इलाके में नकली डीएपी खाद मिलने के आरोप ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद किसानों के बीच भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। महंगे दामों पर खेती के लिए खरीदी गई डीएपी खाद को लेकर जब खेतों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिला तो किसानों को खाद की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह होने लगा। धीरे-धीरे यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और बड़ी संख्या में किसान मौके पर जुट गए।

स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल की अच्छी पैदावार के लिए बाजार से डीएपी खाद खरीदी थी, लेकिन जब इस खाद को खेतों में डाला गया तो यह मिट्टी में पूरी तरह नहीं घुली। किसानों के अनुसार खाद के कण लंबे समय तक वैसे ही पड़े रहे, जिससे संदेह और गहरा गया कि यह नकली या घटिया गुणवत्ता की हो सकती है। इसके बाद किसानों ने पैकेट की बनावट, प्रिंटिंग और रंग-रूप पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए।

किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें असली खाद के नाम पर नकली या मिलावटी उत्पाद दिया गया है, जिससे उनकी फसल पर सीधा असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही महंगे बीज, डीजल और खाद की मार झेल रहे किसान अब इस तरह की घटनाओं से आर्थिक संकट में और फंसते जा रहे हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही कृषि विभाग तुरंत सक्रिय हो गया। अनुमंडल और प्रखंड स्तर के कृषि अधिकारियों की एक टीम मौके पर भेजी गई। टीम ने ओईनी स्थित बिस्कोमान भवन पहुंचकर पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की। इस दौरान कृषि समन्वयक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सहकारिता विभाग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और पूरी स्थिति का जायजा लिया। किसानों ने अधिकारियों को बताया कि जिस डीएपी खाद का उपयोग किया गया, वह संदिग्ध लग रही है। इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित गोदाम और स्टॉक की जांच भी शुरू कर दी।

बिस्कोमान प्रबंधन की ओर से इस मामले पर सफाई दी गई। बिस्कोमान के निदेशक राम कलेवर सिंह ने कहा कि खाद की आपूर्ति रैक प्वाइंट से सीधे गोदाम तक होती है, इसलिए बीच में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना बहुत कम है। उन्होंने कहा कि फिर भी किसानों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके से संदिग्ध डीएपी खाद के सैंपल एकत्र किए और उन्हें गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खाद असली है या नकली। फिलहाल सभी संबंधित स्टॉक को निगरानी में रखा गया है।

ग्रामीणों में इस घटना के बाद भय और गुस्से का माहौल है। किसानों का कहना है कि अगर यह खाद नकली साबित होती है तो उनकी महीनों की मेहनत और लागत पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। कई किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले ही कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं उन्हें और आर्थिक संकट में डाल सकती हैं।

कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बाजार में खाद की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं होती, जिसके कारण इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि खाद की बिक्री और वितरण पर सख्त निगरानी रखी जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें।

इस घटना ने पूरे पूसा क्षेत्र में किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कई किसान अब खाद खरीदने में भी सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी खाद फसलों की वृद्धि में अहम भूमिका निभाती है और इसकी गुणवत्ता खराब होने पर सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

फिलहाल कृषि विभाग की टीम लगातार मामले की निगरानी कर रही है और गोदामों की जांच भी तेज कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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