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25 करोड़ स्मैक कांड में बड़ा खुलासा: बिहार पुलिस का फरार सिपाही रांची से गिरफ्तार, ड्रग्स सिंडिकेट का मास्टरमाइंड निकला

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पटना के 25 करोड़ रुपये के स्मैक कांड में फरार चल रहे बिहार पुलिस के सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक को रांची से गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर ड्रग्स सिंडिकेट चलाने और करोड़ों की अवैध कमाई का गंभीर आरोप है।

पटना/आलम की खबर:पटना के चर्चित 25 करोड़ रुपये के स्मैक कांड ने एक बार फिर बिहार पुलिस और ड्रग्स नेटवर्क दोनों को हिला कर रख दिया है, जब इस पूरे मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी और खुद बिहार पुलिस के सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश को विशेष जांच टीम ने झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार कर लिया। लंबे समय से फरार चल रहा यह आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अलग-अलग जगहों पर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर आखिरकार उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली गई और उसे दबोच लिया गया, जिसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल स्मैक तस्करी तक सीमित नहीं है बल्कि एक बड़े संगठित ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपी की भूमिका मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आ रही है। नालंदा जिले के दीपनगर नगवां का रहने वाला ऋषिकेश क्रांतिकारक बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात था, लेकिन आरोप है कि उसने वर्दी की आड़ में ड्रग्स कारोबार को संरक्षण दिया और धीरे-धीरे इस अवैध धंधे में इतना गहराई से जुड़ गया कि उसने करोड़ों रुपये की काली कमाई कर ली और कई बेनामी संपत्तियां खड़ी कर लीं।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी का नाम तब और गंभीर हो गया जब 2025 में उसका ट्रांसफर गया से भागलपुर किया गया, लेकिन उसने वहां जॉइनिंग ही नहीं की और फरार हो गया, जिसके बाद वह लगातार पुलिस की नजरों से बचता रहा और अलग-अलग राज्यों में अपनी पहचान बदलकर छिपता रहा। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने राजगीर जैसे संवेदनशील इलाके में एक आलीशान बंगला बनाया हुआ है, जो अब पुलिस की जांच और जब्ती प्रक्रिया के दायरे में है, जबकि उसके बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपत्ति की पूरी सूची खंगाली जा रही है ताकि उसकी काली कमाई का पूरा हिसाब सामने आ सके।

यह पूरा मामला पटना के आलमगंज थाना कांड संख्या 294/26 से जुड़ा हुआ है, जिसमें पहले ही दो तस्करों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में समस्तीपुर निवासी जितेंद्र कुमार और जहानाबाद निवासी नीतीश कुमार शामिल हैं, जिनसे पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं और धीरे-धीरे इस सिंडिकेट में पुलिस सिपाही की भूमिका सामने आई, जिससे जांच एजेंसियां भी हैरान रह गईं।

पुलिस ने पटना के आलमगंज और रामकृष्ण नगर स्थित उसके ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें बैंक रिकॉर्ड, चेकबुक, मोबाइल डाटा और संदिग्ध ट्रांजैक्शन से जुड़े कागजात शामिल हैं, जिनसे यह साफ संकेत मिला है कि आरोपी केवल सप्लायर नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाला प्रमुख चेहरा था। लगातार फरार रहने के दौरान वह अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा देता रहा, लेकिन आखिरकार उसकी एक छोटी सी चूक ने रांची में उसकी गिरफ्तारी संभव बना दी।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक को खंगालने में जुट गई है, क्योंकि आशंका है कि इस रैकेट के तार बिहार के कई जिलों के अलावा अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब सभी गिरफ्तार आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही हैं ताकि सप्लाई चेन, फाइनेंसिंग नेटवर्क और बड़े खरीदारों तक पहुंचा जा सके।

इस मामले ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस व्यक्ति पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही कथित तौर पर कानून तोड़कर सबसे बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा बन गया। फिलहाल पुलिस विभाग में भी इस गिरफ्तारी के बाद हड़कंप मचा हुआ है और उच्च स्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है।

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