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सारण में मिड डे मील चावल घोटाला: 800 क्विंटल चोरी और 1100 क्विंटल सड़ा, शिक्षा विभाग में हड़कंप

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सारण जिले में मिड डे मील योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। 800 क्विंटल चावल चोरी और 1100 क्विंटल सड़ने का खुलासा हुआ है, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

सारण/आलम की खबर:सारण जिले में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए संचालित मिड डे मील योजना में एक ऐसा बड़ा घोटाला सामने आया है जिसने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे बच्चों के भोजन के लिए भेजे गए अनाज की भारी मात्रा या तो चोरी हो गई या फिर रख-रखाव की कमी के कारण सड़कर बर्बाद हो गई। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 800 क्विंटल चावल चोरी हो गया, जबकि करीब 1100 क्विंटल चावल गोदाम में ही खराब होकर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया।

यह पूरा मामला Saran जिले के मशरख और परसा प्रखंड से जुड़ा हुआ है, जहां केंद्रीकृत रसोईघरों के माध्यम से मिड डे मील योजना का संचालन किया जा रहा था। इन्हीं गोदामों में बच्चों के लिए भेजे गए चावल का भंडारण किया गया था, लेकिन लंबे समय तक उचित निगरानी, रिकॉर्ड मिलान और गुणवत्ता जांच नहीं होने के कारण बड़ा अंतर सामने आया। जांच में पाया गया कि स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भंडारण में भारी विसंगति है, जिससे यह साफ संकेत मिला कि व्यवस्था में गंभीर अनियमितता हुई है।

इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घोटाला लगभग एक साल तक दबा रहा और किसी स्तर पर इसकी गंभीरता को समय रहते नहीं पकड़ा गया। बाद में थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा की गई गोपनीय जांच में यह सामने आया कि गोदामों में रखा गया चावल या तो गायब है या फिर सड़ चुका है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और मध्यान्ह भोजन योजना कार्यालय में हड़कंप मच गया और तुरंत प्रभाव से कार्रवाई शुरू की गई।

सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब “बाल विकास सेवा संस्थान” नामक एजेंसी ने चार अगस्त 2025 को एमडीएम कार्यालय छपरा को एक लिखित आवेदन दिया। इस आवेदन में बताया गया था कि एक अगस्त 2025 तक मशरख प्रखंड स्थित किचेन में लगभग 1894 क्विंटल चावल उपलब्ध होना चाहिए था। लेकिन जब विभाग ने भौतिक सत्यापन और जांच कराई तो वास्तविक स्थिति बेहद चौंकाने वाली निकली। भारी मात्रा में चावल गायब पाया गया और जो बचा था वह उपयोग के योग्य नहीं था।

जांच रिपोर्ट आने के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्यान्ह भोजन योजना ने संबंधित संस्था पर सख्त कार्रवाई करते हुए 1900 क्विंटल चावल की राशि एक सप्ताह के भीतर ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मशरख और परसा स्थित केंद्रीकृत रसोईघरों का संचालन आगे जारी रखने की अनुमति भी रोक दी गई है। इससे साफ है कि विभाग अब इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

इस पूरे घोटाले में जिस संस्था “बाल विकास सेवा संस्थान” को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि उचित निगरानी और पारदर्शिता के अभाव में बच्चों के भोजन के लिए आया बड़ा अनाज या तो चोरी हो गया या फिर खराब होकर बर्बाद हो गया। इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर कितनी बड़ी खामियां मौजूद हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह मामला लंबे समय तक इसलिए भी दबा रहा क्योंकि नियमित ऑडिट और निरीक्षण में गंभीरता नहीं दिखाई गई। यदि समय रहते जांच होती तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज की चोरी और बर्बादी को रोका जा सकता था। अब इस मामले ने न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर किया है बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है और संभावना है कि आने वाले दिनों में इसमें कई और नाम और जिम्मेदारियां सामने आ सकती हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बड़े मिड डे मील घोटाले में प्रशासन कितनी सख्त कार्रवाई करता है और क्या वाकई में दोषियों को सजा मिलती है या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।

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