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तेजस्वी के एनकाउंटर बयान से बिहार में सियासी घमासान, अपराध और जाति की राजनीति पर फिर छिड़ी बहस

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बिहार में अपराधियों के एनकाउंटर को लेकर तेजस्वी यादव के बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। RJD और NDA के बीच जाति बनाम कानून व्यवस्था की बहस तेज हो गई है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में एक बार फिर अपराध, जाति और जंगलराज को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav के हालिया बयान ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। तेजस्वी यादव ने बिहार में अपराधियों के खिलाफ हो रहे पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन एक खास जाति के लोगों को निशाना बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि हाल के कई एनकाउंटर मामलों में यादव समुदाय से जुड़े आरोपियों को टारगेट किया गया है। उनके इस बयान के बाद NDA नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, लेकिन राजद उन्हें जाति के चश्मे से देखने की कोशिश कर रहा है।

बिहार में पिछले कुछ महीनों के दौरान अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज हुई है। कई जिलों में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि अपराध और संगठित गैंग पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। इसी बीच तेजस्वी यादव ने प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि आखिर एक ही जाति के लोगों के खिलाफ इतनी अधिक कार्रवाई क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि महिलाओं के साथ दुष्कर्म, हत्या और अन्य जघन्य अपराध करने वाले कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस सिर्फ चुनिंदा मामलों में ही सक्रिय नजर आती है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार में अपराध लगातार बढ़ रहा है और सरकार केवल प्रचार आधारित कार्रवाई कर रही है। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

हालांकि तेजस्वी के इस बयान के बाद NDA नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया। बिहार सरकार के समर्थकों और कई नेताओं ने कहा कि अपराधियों को जाति के आधार पर बचाने की कोशिश की जा रही है। नेताओं का कहना है कि पुलिस उन्हीं लोगों पर कार्रवाई कर रही है जिन पर हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और अन्य गंभीर आरोप हैं। सरकार का तर्क है कि कानून अपना काम कर रहा है और कार्रवाई अपराध के आधार पर हो रही है, न कि जाति देखकर।

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की सरकार लगातार “अपराध मुक्त बिहार” का दावा कर रही है। सरकार का कहना है कि बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। NDA नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद अपने पुराने राजनीतिक समीकरणों को बचाने के लिए जातीय भावनाओं को हवा दे रहा है। उनका कहना है कि बिहार की जनता अब जंगलराज की राजनीति नहीं चाहती और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एनकाउंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बिहार की पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी जुड़ी हुई है। राजद लंबे समय से कानून-व्यवस्था और अपराध को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा है। 1990 और 2000 के दशक के दौरान बिहार में अपहरण, रंगदारी और गैंगवार की घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की छवि खराब की थी। उस दौर को लेकर विपक्ष लगातार राजद पर हमला करता रहा है और “जंगलराज” शब्द आज भी बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

पूर्व मुख्यमंत्री Lalu Prasad Yadav के शासनकाल में कई विवादित घटनाएं हुई थीं, जिनका जिक्र आज भी राजनीतिक मंचों पर होता है। राजद विरोधी दलों का आरोप रहा है कि उस समय अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था। इसी संदर्भ में साधु यादव और सुभाष यादव जैसे नाम भी अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि राजद शासन के दौरान अपराध और राजनीति का गठजोड़ मजबूत हुआ था, जिसके कारण राज्य में भय का माहौल पैदा हुआ।

हाल के दिनों में कुछ पुराने मामलों और इंटरव्यू के जरिए भी उस दौर की चर्चा फिर तेज हुई है। विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठा रहा है कि बिहार में अपराध की जड़ें राजद शासनकाल से जुड़ी रही हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का एनकाउंटर को जातीय मुद्दा बताना NDA को बड़ा राजनीतिक मौका दे रहा है। भाजपा और जदयू नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध कर रहा है और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर राजद समर्थकों का कहना है कि सरकार को पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए और हर एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका तर्क है कि अगर किसी समुदाय के लोगों पर अधिक कार्रवाई हो रही है तो उस पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में चुनावी माहौल नजदीक आने के साथ ही जातीय समीकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे और ज्यादा उभर सकते हैं।

फिलहाल बिहार की राजनीति में यह मामला बड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है। एक तरफ NDA सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ राजद सरकार पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि बिहार की राजनीति में जाति और कानून-व्यवस्था दोनों ही बेहद संवेदनशील मुद्दे माने जाते हैं।

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