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पूर्णिया में ‘नो व्हीकल डे’ का असर, अधिकारी साइकिल और टोटो से पहुंचे दफ्तर

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पूर्णिया में ‘नो व्हीकल डे’ के तहत अधिकारियों ने सरकारी गाड़ियों की जगह साइकिल, टोटो और पैदल चलकर कार्यालय पहुंचकर ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

पूर्णिया/आलम की खबर:प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील का असर अब बिहार के सरकारी कार्यालयों में भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को पूर्णिया समाहरणालय परिसर में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ‘नो व्हीकल डे’ के तहत कई अधिकारी सरकारी गाड़ियों की जगह साइकिल, टोटो और पैदल चलकर दफ्तर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों का यह अलग अंदाज जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया।

सुबह जैसे ही समाहरणालय परिसर में कर्मचारियों और आम लोगों की आवाजाही शुरू हुई, लोगों की नजरें अधिकारियों पर टिक गईं। कोई अधिकारी साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंच रहा था तो कोई ई-रिक्शा यानी टोटो से दफ्तर आया। कई अधिकारी ऐसे भी दिखे जिन्होंने छोटी दूरी होने के कारण पैदल चलना बेहतर समझा। पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर सरकारी स्तर पर यह अनोखी पहल लोगों को काफी प्रभावित करती नजर आई।

सबसे ज्यादा चर्चा पूर्णिया के प्रभारी जिला पदाधिकारी Anjani Kumar को लेकर रही। वह अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर टोटो से समाहरणालय पहुंचे। खास बात यह रही कि उनके साथ सुरक्षा में तैनात बॉडीगार्ड भी उसी टोटो में मौजूद थे। वीआईपी सुरक्षा और सरकारी प्रोटोकॉल के बीच यह दृश्य लोगों के लिए काफी अलग और आकर्षक था। समाहरणालय के बाहर मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे सकारात्मक संदेश बताया।

इसी तरह वरीय उप समाहर्ता Ravi Rakesh भी साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचे। उनके सुरक्षाकर्मी भी साइकिल से ही उनके साथ नजर आए। सरकारी अधिकारियों को इस तरह आम लोगों की तरह सड़क पर साइकिल चलाते देख कई लोग रुककर उन्हें देखने लगे। कुछ लोगों ने इसे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण बताया तो कुछ ने कहा कि यदि अधिकारी खुद ऐसा करेंगे तो आम लोग भी प्रेरित होंगे।

‘नो व्हीकल डे’ के दौरान समाहरणालय परिसर में सुबह से ही अलग माहौल देखने को मिला। सरकारी वाहनों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। हालांकि कुछ अधिकारी ऐसे भी थे जिन्होंने इस पहल का पालन नहीं किया और चार पहिया वाहनों से दफ्तर पहुंचे। इसे लेकर कर्मचारियों और लोगों के बीच चर्चा भी होती रही। कई लोगों का कहना था कि यदि सभी अधिकारी एक साथ इस अभियान में शामिल होते तो इसका असर और बड़ा दिखाई देता।

प्रभारी जिला पदाधिकारी अंजनी कुमार ने कहा कि ‘नो व्हीकल डे’ केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह लोगों को जागरूक करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते प्रदूषण और वैश्विक जलवायु संकट को देखते हुए अब ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी तय करने के लिए साइकिल, पैदल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

वहीं वरीय उप समाहर्ता रवि राकेश ने कहा कि दुनिया जिस तरह ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, उसे देखते हुए हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि तेल की खपत कम करना केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार यदि लोग सप्ताह में एक दिन भी निजी वाहन का उपयोग कम कर दें तो इससे बड़ा बदलाव संभव है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार समेत पूरे देश में तेजी से बढ़ते वाहनों के कारण प्रदूषण और ईंधन खपत लगातार बढ़ रही है। बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम, धुआं और वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं। ऐसे में ‘नो व्हीकल डे’ जैसे अभियान लोगों को वैकल्पिक साधनों की ओर प्रेरित कर सकते हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार साइकिल और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने से न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

पूर्णिया समाहरणालय में अधिकारियों की यह पहल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई। लोगों ने तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। कई लोगों ने सुझाव दिया कि इस तरह के अभियान केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि स्कूलों, कॉलेजों और निजी संस्थानों में भी चलाए जाने चाहिए।

हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को लेकर लगातार चिंता बढ़ी है। बिहार भी इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान और ज्यादा महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें तो इसका बड़ा असर दिखाई दे सकता है।

समाहरणालय परिसर में पहुंचे कई लोगों ने कहा कि अधिकारियों को आम लोगों के बीच इस तरह संदेश देते देख अच्छा लगा। कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वे भी कार्यालय आने के लिए साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की कोशिश करेंगे।

फिलहाल पूर्णिया में ‘नो व्हीकल डे’ की यह पहल चर्चा में बनी हुई है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे लोगों में पर्यावरण और ईंधन बचत को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और आने वाले समय में अधिक लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।

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