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Bihar News: बगहा में बेतिया राज जमीन विवाद गहराया, 400 परिवारों को मिला घर खाली करने का नोटिस

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पश्चिम चंपारण के बगहा में बेतिया राज की जमीन पर रह रहे करीब 400 परिवारों को प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। नोटिस के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और लोग कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे हैं।

पश्चिम चंपारण/आलम की खबर: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में एक बार फिर बेतिया राज की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बगहा-एक अंचल क्षेत्र के मझौवा गांव में प्रशासन द्वारा करीब 400 परिवारों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। वर्षों से जमीन पर रह रहे ग्रामीण अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं। उनके पूर्वजों ने यहां घर बनाए, खेती-बाड़ी की और परिवार बसाया। अब अचानक जमीन खाली करने का आदेश मिलने से लोग सदमे में हैं। ग्रामीणों के अनुसार अगर प्रशासन उन्हें यहां से हटाता है तो उनके सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। कई परिवारों ने कहा कि उनके पास न तो दूसरी जमीन है और न ही कहीं और रहने की व्यवस्था।

बताया जा रहा है कि बगहा-एक अंचल प्रशासन ने दूसरी बार नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि बेतिया राज की जमीन पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है और जिन लोगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है, वे अपने दस्तावेज प्रशासन के सामने प्रस्तुत करें। इसके बाद गांव में बेचैनी और डर का माहौल बढ़ गया है। लोग अपने घरों और भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि मामले को मानवीय आधार पर देखा जाए। लोगों का कहना है कि बिना उचित सुनवाई और वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेदखल करना अन्याय होगा। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।

ग्रामीण ध्रुव प्रसाद केशरी, सत्येंद्र प्रसाद केशरी, विनोद प्रसाद केशरी, आलोक जायसवाल, रतन यादव, प्रह्लाद यादव और रामनाथ यादव समेत कई लोगों ने कहा कि उनका पूरा जीवन इसी जमीन से जुड़ा हुआ है। यहां उनके पक्के और कच्चे मकान बने हुए हैं। परिवार के बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक जीवन सब कुछ इसी गांव में है। ऐसे में अचानक घर खाली करने का नोटिस आने से लोग मानसिक तनाव में हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रशासन को पहले सभी पक्षों की बात सुननी चाहिए। कई लोगों ने दावा किया कि उनके पास पुराने दस्तावेज और रसीदें हैं, जिनके आधार पर वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। लोगों ने मांग की कि किसी भी कार्रवाई से पहले दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही गरीब परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

बेतिया राज की जमीन का मामला बिहार में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। राज्य के कई जिलों में बेतिया राज की जमीन पर कब्जे और स्वामित्व को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी और राज संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है, जबकि दूसरी ओर ग्रामीण और स्थानीय लोग अपने वर्षों पुराने निवास का हवाला देते हैं। यही वजह है कि ऐसे मामलों में अक्सर तनाव की स्थिति बन जाती है।

इधर बगहा-एक अंचल की सीओ नर्मदा श्रीवास्तव ने कहा कि विभागीय निर्देश के अनुसार बेतिया राज की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों की पहचान की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज हैं, वे उन्हें प्रशासन के सामने प्रस्तुत करें ताकि मामले की जांच की जा सके।

सीओ ने यह भी कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि विभागीय निर्देशों का पालन करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

इस पूरे मामले के बाद गांव में चिंता का माहौल बना हुआ है। कई परिवारों को डर है कि यदि प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ सकता है। महिलाएं और बुजुर्ग भी काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं लेकिन उन्हें बेघर नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जमीन विवाद जैसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। खासकर उन परिवारों के लिए जो वर्षों से वहां रह रहे हैं और जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। लोगों का मानना है कि बातचीत और समझदारी से इस विवाद का समाधान निकाला जा सकता है।

फिलहाल प्रशासन दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया में जुटा हुआ है। दूसरी ओर ग्रामीण लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में प्रशासन क्या फैसला लेता है और क्या इन 400 परिवारों को राहत मिल पाती है या नहीं।

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