:
Breaking News

बिहार की हर पंचायत में बनेगा मोक्षधाम, 24 घंटे में मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र, ग्रामीण व्यवस्था में बड़ा बदलाव

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत हर ग्राम पंचायत में मोक्षधाम निर्माण और 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की ऐतिहासिक योजना लागू करने का फैसला लिया है, जिससे ग्रामीण अंतिम संस्कार व्यवस्था और प्रशासनिक सेवाएं तेज होंगी।

पटना/आलम की खबर: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी ग्राम पंचायतों में मोक्षधाम यानी शवदाह गृह का निर्माण किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना भी है। पंचायती राज विभाग ने इस योजना के लिए मानक प्राक्कलन तैयार कर दिया है, जिसके अनुसार प्रत्येक मोक्षधाम के निर्माण पर लगभग 22 लाख 17 हजार रुपये की लागत आएगी। यह निर्णय राज्य के ग्रामीण विकास मॉडल में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे गांवों में वर्षों से चली आ रही असुविधाओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके साथ पूरी व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। सूचना एवं जनसंपर्क तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shravan Kumar ने जानकारी दी कि मोक्षधाम परिसर की घेराबंदी विशेष तरीके से की जाएगी, जिसमें मजबूत पिलर और तार फेंसिंग का उपयोग किया जाएगा। इससे परिसर सुरक्षित रहेगा और अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जा सकेगा। इसके अलावा मोक्षधाम के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए दो पंक्तियों में पौधारोपण भी किया जाएगा, जिससे वातावरण शांत और स्वच्छ बना रहे। यह पौधारोपण विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत कराया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

सरकार की इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में बेहद तेज और आसान हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अंतिम संस्कार के 24 घंटे के भीतर मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया की नियमित रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। यदि किसी जिले द्वारा निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट नहीं भेजी जाती है तो उससे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल रूप देने के लिए सरकार ने एक विशेष मोबाइल ऐप भी विकसित किया है। इस ऐप के माध्यम से पंचायत स्तर पर तैयार किए जाने वाले मृत्यु प्रमाण पत्र को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। पंचायत सरकार भवन में कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया के तहत प्रमाण पत्र तैयार कर सीधे ऐप पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण लोग अपने मोबाइल फोन के माध्यम से आसानी से दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। इस डिजिटल प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कागजी कार्यवाही में होने वाली देरी और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी। ऐप में मृतक से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रखी जाएंगी, जिसमें माता-पिता, पुत्र और अन्य परिजनों का विवरण भी शामिल रहेगा, जिससे भविष्य में सरकारी कार्यों और सत्यापन में आसानी होगी।

सरकार ने पंचायत स्तर पर व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वार्ड सदस्य, पंच और वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सचिव को मोक्षधाम का प्रभारी बनाने का निर्णय लिया है। वहीं जिन स्थानों पर पहले से डोमराजा घाट की व्यवस्था मौजूद है, वहां की जिम्मेदारी डोम राजा को ही सौंपी जाएगी ताकि पारंपरिक व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा दोनों एक साथ चल सकें। इस निर्णय का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करना और संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है।

राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण जीवन में एक बड़ा परिवर्तन लाएगी। इससे जहां एक ओर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सम्मानजनक और व्यवस्थित होगी, वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवाओं की गति भी तेज होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में होने वाली देरी से परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी होने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। यह कदम न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि सामाजिक सम्मान और मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, सात निश्चय-3 के तहत शुरू की गई यह योजना बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल को एक नई दिशा देने वाली है। मोक्षधाम निर्माण, डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र व्यवस्था और पर्यावरणीय सुधार जैसे कदम मिलकर राज्य के गांवों में एक व्यवस्थित और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे की नींव रखेंगे। यह योजना आने वाले समय में ग्रामीण सेवाओं की गुणवत्ता और गति दोनों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *