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रोसड़ा में SDPO संजय सिन्हा की सख्त कार्यशैली की चर्चा, त्वरित उद्भेदन से बढ़ा लोगों का भरोसा

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           मोहम्मद आलम

रोसड़ा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय सिन्हा की सक्रिय और सख्त कार्यशैली की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। लोगों का कहना है कि उनके हस्तक्षेप से गंभीर मामलों का तेजी से उद्भेदन संभव हो पा रहा है।

रोसड़ा/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल में इन दिनों यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी की कार्यशैली सबसे अधिक चर्चा में है तो वह नाम है अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संजय सिन्हा का। अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सक्रिय रहने वाले SDPO संजय सिन्हा की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा तेज हो गई है। लोगों का साफ कहना है कि अपराध की घटनाएं पूरी तरह रोक पाना किसी भी व्यवस्था के लिए आसान नहीं होता, लेकिन किसी भी घटना के बाद उसका त्वरित उद्भेदन और अपराधियों को समय पर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाना ही असली पुलिसिंग मानी जाती है, और इस मामले में SDPO संजय सिन्हा की भूमिका सबसे प्रभावी दिखाई देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना स्तर पर कई बार लापरवाही देखने को मिलती है। कई मामलों में शुरुआती कार्रवाई धीमी रहती है, शिकायतकर्ताओं को बार-बार थाना का चक्कर लगाना पड़ता है और जांच की गति भी संतोषजनक नहीं रहती। लेकिन जैसे ही मामला SDPO संजय सिन्हा के संज्ञान में पहुंचता है, पूरे केस की दिशा बदल जाती है। वे खुद मामले की मॉनिटरिंग शुरू कर देते हैं, संबंधित थाना को स्पष्ट निर्देश देते हैं और जरूरत पड़ने पर सीधे हस्तक्षेप भी करते हैं। यही वजह है कि कई मामलों का उद्भेदन तेजी से संभव हो पा रहा है।

बीते कुछ महीनों में रोसड़ा अनुमंडल के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई कई घटनाओं में यह साफ तौर पर देखने को मिला कि SDPO स्तर से सक्रिय निगरानी के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई और अपराधियों तक पहुंचना आसान हो गया। लोगों का कहना है कि संजय सिन्हा केवल कागजी समीक्षा करने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे घटनाओं को गंभीरता से लेकर लगातार फॉलोअप करते हैं। यही कारण है कि थाना स्तर की सुस्ती के बावजूद कई मामलों में पुलिस को सफलता मिली।

क्षेत्र के कई व्यवसायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का कहना है कि SDPO संजय सिन्हा की सबसे बड़ी विशेषता उनकी जवाबदेही तय करने वाली कार्यशैली है। वे किसी भी घटना को हल्के में नहीं लेते और अधीनस्थ अधिकारियों से लगातार अपडेट लेते रहते हैं। यदि किसी मामले में कार्रवाई धीमी होती है तो वे सीधे सवाल भी करते हैं। इससे थाना स्तर पर भी दबाव बना रहता है कि मामलों को गंभीरता से लिया जाए।

लोगों का यह भी कहना है कि अपराधी अपराध करने से पहले पुलिस को सूचना देकर नहीं आते। ऐसे में यह अपेक्षा करना कि किसी इलाके में बिल्कुल अपराध न हो, व्यवहारिक नहीं माना जा सकता। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब कोई घटना घटती है। उस समय पुलिस कितनी तेजी से सक्रिय होती है, कितनी गंभीरता से जांच करती है और कितने कम समय में अपराधियों तक पहुंचती है, यही उसकी वास्तविक क्षमता को दिखाता है। रोसड़ा अनुमंडल में यह भूमिका सबसे अधिक SDPO संजय सिन्हा निभाते दिखाई दे रहे हैं।

कई चर्चित मामलों में भी SDPO स्तर से लगातार निगरानी की वजह से पुलिस को सफलता मिली। तकनीकी जांच, लगातार छापेमारी, संदिग्धों से पूछताछ और घटनास्थल के वैज्ञानिक विश्लेषण जैसे पहलुओं पर उनका विशेष फोकस रहता है। यही वजह है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी देखने को मिल रही है।

स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा भी मजबूत हुई है कि यदि किसी पीड़ित की बात सीधे SDPO संजय सिन्हा तक पहुंच जाए तो मामले में कार्रवाई की उम्मीद बढ़ जाती है। लोग उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में देख रहे हैं जो केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहते बल्कि जमीनी स्तर पर मामलों को समझने की कोशिश करते हैं।

रोसड़ा अनुमंडल में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं के बीच कई लोगों ने यह भी कहा कि थाना स्तर पर व्यवस्था में अभी काफी सुधार की जरूरत है। लेकिन इसके बावजूद SDPO संजय सिन्हा की सक्रियता कई मामलों में व्यवस्था को संभाल लेती है। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली की चर्चा अब अनुमंडल से निकलकर जिले के अन्य हिस्सों में भी होने लगी है।

जानकारों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की पहचान केवल पद से नहीं बल्कि उसके काम से बनती है। रोसड़ा अनुमंडल में संजय सिन्हा की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बन रही है जो मामलों को गंभीरता से लेते हैं और परिणाम देने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि आम लोगों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है।

हालांकि चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। बदलते अपराध के तरीके, सीमित संसाधन और बढ़ती जनसंख्या के बीच पुलिस व्यवस्था पर लगातार दबाव बना रहता है। लेकिन इन परिस्थितियों में भी यदि कोई अधिकारी लगातार सक्रियता दिखाए और मामलों के त्वरित उद्भेदन पर फोकस रखे, तो उसका असर जनता के विश्वास पर साफ दिखाई देता है।

रोसड़ा क्षेत्र के लोगों को अब उम्मीद है कि SDPO संजय सिन्हा की इसी सक्रिय कार्यशैली का असर आने वाले दिनों में और अधिक दिखाई देगा तथा अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला और तेज होगा।

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