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IGIMS में आयुष्मान योजना में 45 लाख रुपये घोटाले की जांच तेज, तीन साल के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी टीम

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पटना के IGIMS में आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 45 लाख रुपये के कथित घोटाले की जांच तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा जब्त कर तीन साल के इलाज की ऑडिट शुरू करने का फैसला लिया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए कथित वित्तीय घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। करीब 45 लाख रुपये की अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए छह सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है। बुधवार को समिति ने संस्थान पहुंचकर औपचारिक जांच शुरू की, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई।

जांच टीम ने सबसे पहले संस्थान के प्रशासनिक भवन में अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में आयुष्मान भारत योजना के संचालन, लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन, भुगतान प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक टीम ने शुरुआती जांच में कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड चिन्हित किए हैं, जिनसे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

बैठक की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई। जांच शुरू होने से पहले विभाग के प्रतिनिधि अधिकारियों ने मुख्य ओपीडी भवन स्थित आयुष्मान भारत कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान तकनीकी शाखा के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को भी बुलाया गया ताकि योजना से जुड़े कंप्यूटर डेटा और डिजिटल एंट्री की बारीकी से जांच की जा सके।

सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने आउटसोर्सिंग एजेंसी मेहता डाटा मैट्रिक्स कंपनी के कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम की भी जांच की। कई महत्वपूर्ण फाइलें, हार्ड डिस्क और डिजिटल डेटा को टीम ने अपने कब्जे में लिया है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि गड़बड़ी कोई हालिया मामला नहीं, बल्कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से लगातार चल रही थी।

आरोप है कि आयुष्मान भारत योजना के कई पात्र मरीजों को सरकारी लाभार्थी श्रेणी में दर्ज करने के बजाय नकद भुगतान वाले मरीज के रूप में दिखाया गया। इसके बाद उनसे इलाज के नाम पर नकद राशि वसूली गई और सरकारी रिकॉर्ड में अलग तरह की एंट्री कर वित्तीय गड़बड़ी की गई। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बड़े घोटालों में गिना जा सकता है।

जांच समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए सभी इलाजों की विस्तृत ऑडिट कराई जाएगी। इसमें मरीजों की सूची, अस्पताल बिल, भुगतान रिकॉर्ड, लाभार्थी एंट्री और बैंकिंग प्रक्रिया का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा योजना से जुड़े स्थायी कर्मचारियों और संविदा कर्मियों से भी पूछताछ की जाएगी।

बताया जा रहा है कि आयुष्मान योजना के संचालन की जिम्मेदारी संस्थान प्रशासन ने मेहता डाटा मैट्रिक्स कंपनी को आउटसोर्स की थी। इसी कंपनी के कुछ कर्मचारियों पर फर्जी एंट्री और भुगतान में हेराफेरी का आरोप लगा है। जांच टीम ने कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को भी तलब किया है और उनसे संचालन प्रक्रिया की जानकारी मांगी जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत पर शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर में अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है। इन पर सरकारी राशि के दुरुपयोग, रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि इस पूरे मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। इसी कारण टीम अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल लॉग और तकनीकी रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर साइबर और फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है।

आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल है, जिसके तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। ऐसे में इस योजना में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद आम लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि गरीब मरीजों के नाम पर सरकारी राशि की हेराफेरी बेहद गंभीर मामला है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फिलहाल जांच पूरी होने तक खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

उधर संस्थान के भीतर भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई कर्मचारियों में जांच के दायरे में आने को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। जांच टीम लगातार दस्तावेजों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है।

फिलहाल इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आखिर सरकारी योजना के नाम पर यह कथित खेल कितने बड़े स्तर पर चल रहा था।

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