:
Breaking News

बिहार भूमि सर्वे 2026: अब गांवों के साथ शहरों में भी होगा जमीन सर्वे, नई नियमावली को मंजूरी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार सरकार ने भूमि सर्वे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों में भी जमीन सर्वे होगा। कैबिनेट ने नई नियमावली 2026 को मंजूरी दी है जिससे भूमि रिकॉर्ड डिजिटल और पारदर्शी बनेंगे।

पटना/आलम की खबर: बिहार सरकार ने भूमि सुधार और जमीन रिकॉर्ड व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा निर्णय लिया है, जिसका असर पूरे राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा। अब तक जहां भूमि सर्वेक्षण का काम केवल गांवों तक सीमित था, वहीं अब इसे शहरों तक विस्तारित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद नगर निकाय क्षेत्रों में भी जमीन का नया सर्वे, खतियान और भू-नक्शा तैयार किया जाएगा।

राज्य में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर सहमति बनी, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली 2026 को लागू करने का रहा। इस नियमावली के लागू होने के बाद राज्य की भूमि रिकॉर्ड प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और इसे पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार का कदम माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार, पिछले लगभग दो वर्षों से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन सर्वेक्षण का कार्य लगातार जारी है। इस दौरान कई प्रकार की तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आईं, जिनके आधार पर नियमों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई। इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब सरकार ने तय किया है कि भूमि सर्वेक्षण के दायरे को और बढ़ाया जाएगा और इसे शहरी क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।

नई नियमावली 2026 में कई पुराने प्रावधानों को संशोधित किया गया है और कुछ नए नियम भी जोड़े गए हैं। वहीं जिन प्रावधानों की अब आवश्यकता नहीं रह गई थी, उन्हें हटा दिया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया को सरल, तेज और प्रभावी बनाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे जमीन सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और कामकाज में तेजी आएगी।

कैबिनेट बैठक के बाद विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि और अन्य प्रकार की जमीनों का नया रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब इसी मॉडल को शहरी क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में बढ़ते जमीन विवाद, अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों की समस्या को देखते हुए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार ने यह भी तय किया है कि भूमि सर्वेक्षण से जुड़े सभी तकनीकी शब्दों की स्पष्ट परिभाषा तय की जाएगी, ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। खासकर शहरी इलाकों में, जहां जमीन की कीमतें अधिक होती हैं और विवाद भी ज्यादा होते हैं, वहां यह व्यवस्था बेहद उपयोगी साबित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बिहार में जमीन विवादों में काफी कमी आएगी। अवैध कब्जों, फर्जी दस्तावेजों और स्वामित्व संबंधी विवादों पर नियंत्रण पाने में यह कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही सरकार को भूमि प्रबंधन और राजस्व संग्रहण में भी आसानी होगी।

राज्य सरकार का उद्देश्य एक आधुनिक और पूरी तरह डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रणाली विकसित करना है, जिसमें सभी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध हों। आने वाले समय में खतियान, भू-नक्शा और अन्य भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम किया जाएगा।

इससे आम लोगों को अपने जमीन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त करने में आसानी होगी और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पारदर्शी व्यवस्था के जरिए भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

सरकार का यह कदम बिहार में भूमि सुधार की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनेगी।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *