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खगड़िया में कोसी नदी का कहर, कपसिया–बीरवास पीपा पुल का दक्षिणी हिस्सा धंसा, मधेपुरा-सहरसा-भागलपुर का संपर्क टूटा

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बिहार के खगड़िया में कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कपसिया–बीरवास पीपा पुल का दक्षिणी हिस्सा धंस गया। इसके चलते मधेपुरा, सहरसा और भागलपुर का संपर्क टूट गया है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खगड़िया/आलम की खबर:बिहार के खगड़िया जिले से गुरुवार को एक बड़ा हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। गोगरी प्रखंड के पसराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण कपसिया–बीरवास पीपा पुल का दक्षिणी हिस्सा अचानक धंस गया। इस घटना के बाद खगड़िया का संपर्क मधेपुरा, सहरसा और भागलपुर जैसे जिलों से पूरी तरह टूट गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में आवागमन व्यवस्था प्रभावित हो गई है।

जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और नदी में तेज बहाव बना हुआ था। गुरुवार सुबह अचानक तेज कटाव और पानी के दबाव के कारण पुल का दक्षिणी सिरा कमजोर पड़ गया और देखते ही देखते बड़ा हिस्सा पानी में समा गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पीपा पुल का उद्घाटन इसी वर्ष 28 जनवरी को धूमधाम से किया गया था। लेकिन महज कुछ ही महीनों में पुल का इस तरह धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पुल निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह था। इसके टूट जाने से स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और व्यापारियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। अब लोगों को नदी पार करने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो काफी जोखिम भरा साबित हो रहा है। कई गांवों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों में पैकांत मुखिया सिंकू पासवान, देवठा पंचायत के मुखिया आलोक कुमार, पूर्व मुखिया क्षत्री शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर शर्मा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुल का फाउंडेशन कोसी नदी के तेज कटाव को सहन करने में सक्षम नहीं था और निर्माण के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई है।

विभागीय जानकारी के अनुसार हर साल कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इस पीपा पुल को 15 जून तक हटाने की योजना रहती है, लेकिन इस बार समय से पहले ही पुल का हिस्सा धंस जाने से विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही गोगरी एसडीओ संजय कुमार और बीडीओ रघुनंदन आनंद मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने इंजीनियरों की टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश जारी किए। मौके पर मौजूद पुल के सुपरवाइजर पवन कुमार ने बताया कि नदी के तेज बहाव और अचानक बढ़े जलस्तर के कारण दक्षिणी हिस्से की जमीन कमजोर हो गई थी, जिससे यह हादसा हुआ।

सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने मधेपुरा की ओर से आने-जाने वाले मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जाएगी।

एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि विभाग को तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

फिलहाल पूरे इलाके में तनाव और परेशानी का माहौल है और लोग प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

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