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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: एनडीए में सीट बंटवारे पर घमासान तेज, जदयू-भाजपा समेत दलों में उम्मीदवारों को लेकर हलचल

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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग और उम्मीदवार चयन पर चर्चा तेज हो गई है। जदयू, भाजपा, लोजपा और आरएलएम में दावेदारी को लेकर सियासी हलचल बढ़ी है।

पटना/आलम की खबर:बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही राज्य की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। कुल 10 सीटों पर होने वाले इस चुनाव को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज हो गया है। सभी प्रमुख दलों में दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है और राजनीतिक गलियारों में लॉबिंग का दौर भी शुरू हो चुका है।

हालांकि एनडीए के नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है और सभी फैसले आपसी सहमति से लिए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी स्पष्ट किया है कि एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर पूरी तरह सहमति है और समय आने पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी।

सूत्रों के अनुसार एनडीए में 10 सीटों में से जदयू को चार, भाजपा को तीन सीटें मिलने की संभावना है। वहीं एक सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा और एक सीट चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में जा सकती है। बची हुई एक सीट को लेकर सहयोगी दलों के बीच चर्चा जारी है।

सबसे अधिक हलचल भारतीय जनता पार्टी के खेमे में देखी जा रही है, जहां तीन सीटों के लिए कई नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। पार्टी के भीतर अतिपिछड़ा वर्ग के नेताओं की सक्रियता भी बढ़ी हुई है। कुम्हार, मालाकार और पासी समाज के नेता भी प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। वहीं यादव समाज से भी किसी चेहरे को मौका दिए जाने पर चर्चा चल रही है।

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जदयू में भी उम्मीदवारों को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है। उनके अलावा बाकी तीन सीटों पर पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय करने की रणनीति बना रहा है। जदयू एक अल्पसंख्यक चेहरे को भी मौका दे सकती है, जबकि अन्य सीटों पर अतिपिछड़ा और कोइरी-कुशवाहा समाज के नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से मंत्री दीपक प्रकाश का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उन्हें छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है, इसलिए उनका विधान परिषद जाना लगभग तय माना जा रहा है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में भी उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगा।

उधर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर राजद को एक सीट मिलने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

राजद में पूर्व विधान पार्षद सुनील सिंह और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। अंतिम निर्णय पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सिंगापुर रवाना होने से पहले लिए जाने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव बिहार की राजनीति में नए समीकरण तैयार कर सकता है। सभी दल सामाजिक संतुलन और आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवार तय करने में लगे हैं।

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