:
Breaking News

पटना रिंग रोड प्रोजेक्ट पर संकट: जमीन अधिग्रहण और मुआवजा विवाद में फंसा बिहार का ड्रीम प्रोजेक्ट

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

173.5 किलोमीटर लंबा पटना रिंग रोड प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान और फंड की देरी के कारण प्रभावित हो गया है। जानिए बिहार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजधानी पटना को वर्षों से परेशान कर रही ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए तैयार किया गया महत्वाकांक्षी पटना रिंग रोड प्रोजेक्ट फिलहाल कई चुनौतियों के जाल में उलझ गया है। राज्य के सबसे बड़े सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल इस परियोजना से लाखों लोगों को उम्मीदें हैं, लेकिन जमीन अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी के कारण इसका निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे इसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

करीब 173.5 किलोमीटर लंबी इस रिंग रोड योजना को बिहार के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल राजधानी में ट्रैफिक का दबाव कम करना ही नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना भी है। इसके निर्माण के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले भारी वाहन पटना शहर में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और यात्रा का समय भी घटेगा।

परियोजना के तहत प्रस्तावित मार्ग पटना, वैशाली और सारण जिलों को जोड़ते हुए एक व्यापक परिवहन नेटवर्क तैयार करेगा। सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिंग रोड भविष्य में बिहार की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने का काम करेगी। औद्योगिक इकाइयों, व्यापारिक केंद्रों और कृषि उत्पादों के परिवहन में भी इसका बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है।

हालांकि इन तमाम संभावनाओं के बावजूद परियोजना की प्रगति फिलहाल धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। विशेष रूप से कन्हौली से शेरपुर तक प्रस्तावित छह लेन सड़क का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि निर्माण एजेंसी का चयन हो चुका है और तकनीकी स्तर पर कई तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अधूरी रहने के कारण कार्यादेश जारी नहीं किया जा सका है। नतीजतन निर्माण एजेंसी को काम शुरू करने की अनुमति नहीं मिली है।

जानकारी के अनुसार परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में निजी भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए सैकड़ों किसानों और भू-स्वामियों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। प्रशासन ने मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू की थी, लेकिन कई तकनीकी और कानूनी बाधाओं के कारण यह काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। अधिकारियों का कहना है कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवाद, पारिवारिक बंटवारे के लंबित मामले और दस्तावेजों की जांच जैसी प्रक्रियाएं भुगतान में देरी का कारण बन रही हैं।

कई स्थानों पर एक ही जमीन पर एक से अधिक लोगों द्वारा दावा किए जाने की स्थिति भी सामने आई है। ऐसे मामलों में प्रशासन को पहले स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है। इसके अलावा कुछ भू-स्वामियों ने मुआवजे की दरों पर भी आपत्ति जताई है और अधिक भुगतान की मांग की है। इससे पूरी प्रक्रिया और जटिल होती जा रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण का एक बड़ा हिस्सा अभी लंबित है। वहीं मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी तरह से संतोषजनक स्थिति में नहीं पहुंच सकी है। इससे परियोजना की समय-सीमा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि अधिग्रहण और भुगतान की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई तो निर्माण कार्य में और अधिक देरी हो सकती है।

इस परियोजना को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म होने लगा है। विपक्षी दल सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगा रहे हैं कि राज्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है। उनका कहना है कि विकास के बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर काम की गति संतोषजनक नहीं है। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाएं स्वाभाविक रूप से समय लेने वाली होती हैं और सरकार लगातार समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।

परियोजना के वित्तीय पक्ष को लेकर भी चर्चा तेज है। केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक राशि जारी किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों तक धनराशि पहुंचने और उसके उपयोग की प्रक्रिया में देरी बताई जा रही है। इससे मुआवजा भुगतान और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही वित्तीय प्रक्रिया पूरी होगी, लंबित कार्यों में तेजी लाई जाएगी।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस परियोजना को राजधानी के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंजूरी दी थी। उम्मीद थी कि स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा और अगले कुछ वर्षों में इसका लाभ लोगों को मिलने लगेगा। लेकिन वर्तमान स्थिति ने परियोजना की गति को प्रभावित कर दिया है।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि पटना रिंग रोड के निर्माण से राजधानी में यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में शहर के भीतर प्रवेश करने वाले भारी वाहनों के कारण जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है। रिंग रोड बनने के बाद ऐसे वाहन सीधे बाहरी मार्गों का उपयोग कर सकेंगे, जिससे शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा।

इसके अलावा यह परियोजना निवेश आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास की आधारशिला माना जाता है। ऐसे में पटना रिंग रोड बिहार की विकास यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि प्रशासन और संबंधित विभाग इन बाधाओं को जल्द दूर करने में सफल होते हैं तो परियोजना को नई गति मिल सकती है। अन्यथा बिहार की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में से एक यह ड्रीम प्रोजेक्ट लंबे इंतजार का शिकार हो सकता है।

यह भी पढ़ें:

• गोपालगंज में पुलिस मुठभेड़ के बाद 50 हजार का इनामी अपराधी गिरफ्तार • बेगूसराय डीटीओ रिश्वत कांड में निगरानी की बड़ी कार्रवाई • समस्तीपुर जनता दरबार में डीएम ने सुनीं सैकड़ों शिकायतें

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *