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महुआ बना यादव परिवार का कुरुक्षेत्र: तेजस्वी बनाम तेजप्रताप, अब पार्टी और परिवार आमने-सामने!

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पटना — बिहार की सियासत में रविवार का दिन एक नए मोड़ की गवाही दे गया। लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों  तेजस्वी और तेजप्रताप  के बीच ठनी हुई है, और रणभूमि बनी है वैशाली की महुआ विधानसभा सीट। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने यहां अपनी पार्टी राजद (RJD) के उम्मीदवार मुकेश रौशन के समर्थन में सभा कर दी, और यही कदम अब बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत बन गया है, पार्टी पहले, परिवार बाद में।
तेजस्वी ने भीड़ से कहा, “किसी भी तरह का कन्फ्यूजन मत रखिए, पार्टी सबसे बड़ी होती है। लालू जी ने जिसे टिकट दिया है, वही सही उम्मीदवार है।यह बयान सीधा अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव की तरफ था, जो इसी सीट से अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।तेजस्वी के इस बयान के तुरंत बाद तेजप्रताप ने पलटवार किया “पार्टी नहीं, जनता हमारी मालिक है!” उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतंत्र में सबसे ऊपर जनता होती है, कोई पार्टी या परिवार नहीं। उनके इस जवाब से यह साफ हो गया कि यादव परिवार के भीतर सियासी दूरी अब अंतर” नहीं, बल्कि “टकराव” बन चुकी है।

पार्टी बनाम परिवार की जंग

महुआ में जो हो रहा है, वह सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं बल्कि एक सियासी प्रयोगशाला बन गया है — जहां लालू यादव की विरासत, आरजेडी की निष्ठा और जनता की नब्ज़ तीनों टकरा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का महुआ जाना प्रतीकात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक था। उन्होंने यह साफ संदेश दिया कि “राजद सिर्फ एक परिवार की पार्टी नहीं, बल्कि विचारधारा की पार्टी है।” वहीं तेजप्रताप अपनी जमीनी पकड़ और पुराने वोट बैंक के सहारे यह साबित करना चाहते हैं कि वफादारी जनता से होती है, न कि पार्टी से।

सियासी असर पूरे बिहार पर

महुआ का यह चुनाव अब बिहार की राजनीति में एक बड़े परिवार बनाम पार्टी मॉडल की तरह देखा जा रहा है। अगर तेजप्रताप जनता के भरोसे जीतते हैं, तो यह आरजेडी के लिए झटका होगा। लेकिन अगर तेजस्वी के उम्मीदवार मुकेश रौशन बाजी मार लेते हैं, तो यह संदेश जाएगा कि अब “लालू ब्रांड” से आगे “आरजेडी ब्रांड” स्थापित हो चुका है।

भाई-भाई में अब पर्दा नहीं

एक वक्त था जब लालू के दोनों बेटे मंच साझा करते थे, अब वही मंच दो खेमों में बंट गया है। तेजस्वी ने कहा कि “पार्टी ही मां-बाप है,” तो तेजप्रताप ने जवाब दिया, “जनता असली भगवान है।महुआ की मिट्टी अब केवल वोट नहीं गिन रही, यह तय कर रही है कि बिहार में विरासत बड़ी है या विचारधारा।इस चुनाव के नतीजे चाहे जो हों, इतना तय है — लालू परिवार की राजनीति अब घर की चौखट से निकलकर सड़क पर आ चुकी है, और बिहार की जनता अब खुद इस पारिवारिक संग्राम की निर्णायक बनेगी।

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