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गिरिराज सिंह को “दो गज जमीन” मामले में राहत, कोर्ट ने अग्रिम जमानत बरकरार रखी, अगली सुनवाई पर नजर

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बेगूसराय एमपी-एमएलए कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की अग्रिम जमानत बरकरार रखी है। “दो गज जमीन” बयान मामले में धारा 205 पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।

बेगूसराय/आलम की खबर: बिहार की राजनीति से जुड़ा चर्चित “दो गज जमीन” बयान मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह को अदालत से बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत को बरकरार रखते हुए फिलहाल उन्हें कानूनी राहत प्रदान की है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में इस मामले की अहम सुनवाई हुई। एमपी-एमएलए कोर्ट के एसीजेएम प्रथम की अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व में दी गई अग्रिम जमानत को जारी रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही व्यक्तिगत रूप से हर सुनवाई में उपस्थित होने से स्थायी छूट देने संबंधी दायर आवेदन पर अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जिसे आगामी सुनवाई में सुनाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उनके अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि वे लगातार कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट दी जानी चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत को बरकरार रखा, जबकि धारा-205 के तहत दायर आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के बाद गिरिराज सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके खिलाफ यह मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया था। उन्होंने दावा किया कि 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत कर केस दर्ज कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर लगाई गई धाराएं अतिरंजित हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने अदालत द्वारा दिए गए राहत के फैसले पर संतोष जताते हुए न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया।

मामले की पैरवी कर रहे भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा हुआ है, जब जीडी कॉलेज परिसर में दिए गए एक भाषण के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में नगर थाना कांड संख्या-221/2019 दर्ज किया गया था, जिसमें धार्मिक विद्वेष फैलाने समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।

अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि इतने वर्षों बाद भी अभियोजन पक्ष की ओर से कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। न तो कथित भाषण की कोई प्रमाणिक ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है और न ही केस से संबंधित जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड में शामिल किए गए हैं। ऐसे में मामले की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

यह मामला 6 अप्रैल 2019 के उस विवादित बयान से जुड़ा है, जिसे लेकर उस समय राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया था। उस बयान को लेकर विरोध और समर्थन दोनों ही स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि केस की मूल फाइल और केस डायरी से जुड़े दस्तावेजों को लेकर पहले भी अदालत में सवाल उठ चुके हैं, जिससे मामले की प्रक्रिया पर भी चर्चाएं होती रही हैं।

फिलहाल अदालत द्वारा अग्रिम जमानत को बरकरार रखने के फैसले से गिरिराज सिंह को बड़ी राहत मिली है। वहीं धारा-205 के तहत आवेदन पर आने वाला अगला आदेश इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें अगली सुनवाई और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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