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बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर सख्त निर्देश, मुख्यमंत्री ने हर महीने 10 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने को कहा

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बिहार में लाखों पेंशनधारकों के लिए राहत भरी खबर। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन समय पर लाभार्थियों के खातों में भेजने के सख्त निर्देश दिए।

पटना/आलम की खबर:बिहार में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े लाखों लाभार्थियों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और राहत भरा निर्णय लिया है। लंबे समय से पेंशन भुगतान में देरी की शिकायतों और लाभार्थियों की परेशानियों को देखते हुए अब सरकार ने स्पष्ट और सख्त व्यवस्था लागू करने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि हर हाल में प्रत्येक माह की 10 तारीख तक लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच जानी चाहिए। इस निर्देश के बाद राज्य के लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह समीक्षा बैठक लोकसेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित की गई थी, जिसमें समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि कई बार तकनीकी कारणों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के चलते पेंशन भुगतान समय पर नहीं हो पाता, जिससे सीधे तौर पर उन लोगों को कठिनाई होती है जिनके लिए यह राशि जीवन-यापन का मुख्य सहारा होती है। इसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आगे से किसी भी स्थिति में भुगतान की समय-सीमा प्रभावित न हो।

सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता का साधन नहीं है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक जिम्मेदारी और कल्याणकारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की देरी न केवल प्रशासनिक कमी मानी जाएगी बल्कि सीधे तौर पर जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा भी होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों पर नहीं बल्कि वास्तविक रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों को सशक्त बनाना है, और इसके लिए यह जरूरी है कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और पारदर्शी हो।

समीक्षा बैठक के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाए ताकि उपस्थिति, पोषण वितरण और सेवाओं की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए कुपोषण, स्टंटिंग और वेस्टिंग जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने होंगे।

इसके साथ ही परवरिश योजना और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं के दायरे को और बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ा जाए और इसके लिए पहचान प्रक्रिया को और अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए, इसके लिए फील्ड स्तर पर निगरानी को मजबूत करना आवश्यक है।

बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी सामने आया कि समाज कल्याण विभाग में कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे योजनाओं के प्रभावी संचालन में कठिनाई आती है। मुख्यमंत्री ने इन पदों को जल्द से जल्द भरने के निर्देश दिए ताकि प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाई जा सके और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।

पूरे बैठक में मुख्यमंत्री का फोकस एक ही बात पर रहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और परिणाम आधारित होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचे।

इस पूरे फैसले के बाद राज्य के सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों में उम्मीद जगी है कि अब उन्हें समय पर और नियमित रूप से भुगतान मिलेगा, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने वाला भी माना जा रहा है।

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