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Bihar Land Department Action: राजस्व विभाग में बड़ी सफाई, 8 अधिकारियों पर गिरी गाज, 15 दिन चलेगा विशेष अभियान

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बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने लापरवाही और अनियमितताओं के आरोपों में 8 अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। विभागीय जांच, चार्जशीट और लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया गया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में भूमि और राजस्व संबंधी मामलों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने विभागीय व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही, अनियमितता और जनता की समस्याओं की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग की हालिया कार्रवाई को प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार विभाग ने विभिन्न जिलों में कार्यरत रहे कई अंचल एवं राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। इन अधिकारियों पर सेवा संबंधी दायित्वों के निर्वहन में कथित लापरवाही, मामलों के निष्पादन में देरी तथा प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप हैं। विभागीय स्तर पर उपलब्ध रिपोर्टों और जांच के आधार पर इनके विरुद्ध आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हाल के दिनों में विभागीय कार्यप्रणाली की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि जनता से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा था कि भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और अन्य राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी से आम लोगों को परेशानी होती है और सरकार की छवि भी प्रभावित होती है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से कई जिलों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि राजस्व संबंधी फाइलें लंबे समय तक लंबित पड़ी हैं। कई मामलों में आवेदकों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने व्यापक समीक्षा अभियान चलाया और संबंधित अधिकारियों के कार्य निष्पादन का मूल्यांकन कराया।

बताया जा रहा है कि हालिया कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि विभाग में जवाबदेही की नई व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है। सरकार चाहती है कि भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता बढ़े तथा लोगों को सेवाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में भूमि संबंधी मामलों का सीधा संबंध लाखों लोगों से होता है। दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार, परिमार्जन, सीमांकन और भूमि अभिलेखों से जुड़ी प्रक्रियाओं में देरी से किसानों, आम नागरिकों और निवेशकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करना प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इसी क्रम में विभाग ने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विशेष अभियान शुरू करने का भी निर्णय लिया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अतिरिक्त समय देकर लंबित आवेदनों का निपटारा करें। इसका उद्देश्य उन हजारों मामलों को तेजी से निष्पादित करना है जो विभिन्न कारणों से लंबे समय से लंबित हैं।

जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में दाखिल-खारिज, ई-मापी, परिमार्जन और अन्य भूमि संबंधी मामलों के समाधान के लिए विशेष शिविर और कैंप आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे आम लोगों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने जिलाधिकारियों को भी निगरानी की विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे राजस्व अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा करें और मामलों के निष्पादन की गुणवत्ता पर नजर रखें। इसके लिए चयनित मामलों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी की जा रही है।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि केवल कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्यवस्था में स्थायी सुधार भी जरूरी है। इसलिए विभाग द्वारा निगरानी तंत्र को मजबूत करने और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार या लापरवाही की संभावनाएं कम होंगी।

राजस्व विभाग बिहार सरकार के उन प्रमुख विभागों में शामिल है जिनका सीधा संबंध आम जनता से रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और रिकॉर्ड संबंधी समस्याएं अक्सर लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। ऐसे में विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का संदेश जनता के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि यह भी जरूरी होगा कि कार्रवाई के साथ-साथ लंबित मामलों के समाधान और सेवा वितरण में वास्तविक सुधार दिखाई दे।

फिलहाल विभाग द्वारा शुरू किए गए इस अभियान पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस कार्रवाई का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ता है और राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार देखने को मिलता है। लेकिन इतना तय है कि विभाग ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही और अनियमितता के लिए अब पहले जैसी गुंजाइश नहीं रहने वाली है।

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