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धर्मपुर मोहल्ले में बिना मानकों के अस्पताल संचालन का आरोप, बच्चों के खतना को लेकर उठे सवाल; जांच की मांग तेज

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समस्तीपुर शहर के धर्मपुर मोहल्ले में संचालित डॉ जाकिर हुसैन अस्पताल पर बिना नियमों के संचालन और बच्चों के खतना को लेकर आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की गई है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर शहर के धर्मपुर मोहल्ले में संचालित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित नियमों और मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यहां छोटे-छोटे बच्चों का खतना ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल काफी समय से संचालित हो रहा है। आरोप है कि अस्पताल के संचालन के लिए आवश्यक पंजीकरण, लाइसेंस और स्वास्थ्य विभाग की अनुमति से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर कोई अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र नियमों के अनुसार संचालित होता है तो वहां चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं और विभागीय अनुमति की जानकारी स्पष्ट रूप से होनी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में लोग शहर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार जानकारी के अभाव में ऐसे स्थानों पर पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें कम खर्च में इलाज का भरोसा दिया जाता है। लोगों का कहना है कि ऐसे मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

खतना जैसी प्रक्रिया को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बच्चों से जुड़ी किसी भी चिकित्सकीय प्रक्रिया को पूरी सावधानी, स्वच्छ वातावरण और प्रशिक्षित चिकित्सक की निगरानी में किया जाना चाहिए। यदि किसी संस्थान में बिना पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था के ऐसी प्रक्रिया की जाती है तो इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, इस मामले में अस्पताल संचालक या संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी निजी अस्पताल, क्लीनिक या नर्सिंग होम के संचालन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण और आवश्यक मानकों का पालन जरूरी होता है। इसमें चिकित्सकों की योग्यता, चिकित्सा उपकरण, साफ-सफाई, मरीजों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था जैसी चीजें शामिल होती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि धर्मपुर स्थित इस अस्पताल में नियमों की अनदेखी हो रही है तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

इस मामले को लेकर सिविल सर्जन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाने के कारण विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी कि अस्पताल के पास जरूरी अनुमति और पंजीकरण उपलब्ध है या नहीं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग की एक टीम मौके पर जाकर अस्पताल की जांच करे। जांच के दौरान अस्पताल के दस्तावेज, चिकित्सकों की योग्यता, पंजीकरण की स्थिति और वहां दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति की पड़ताल की जाए। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए, खासकर जब मामला छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा हो।

समस्तीपुर जैसे जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर रहती है। ऐसे में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को समय-समय पर ऐसे संस्थानों की जांच करनी चाहिए ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और धर्मपुर स्थित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल की व्यवस्था की जांच कब शुरू होती है। फिलहाल स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है और सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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संपादकीय: स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता जरूरी, जांच से ही साफ होगी हकीकत

समस्तीपुर शहर के धर्मपुर मोहल्ले में संचालित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल को लेकर उठे सवाल स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर एक बार फिर चर्चा खड़ी करते हैं। किसी भी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र का सबसे बड़ा दायित्व मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराना होता है। खासकर बच्चों से जुड़ी किसी भी चिकित्सकीय प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी और प्रशिक्षित चिकित्सकीय व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अब सबसे जरूरी कदम निष्पक्ष जांच है। किसी भी संस्थान पर लगे आरोपों की सच्चाई केवल विभागीय जांच और दस्तावेजों की पड़ताल से ही सामने आ सकती है। यदि अस्पताल सभी नियमों और मानकों को पूरा करता है तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, वहीं अगर कहीं कमी पाई जाती है तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीण और गरीब परिवार अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर रहते हैं। जानकारी के अभाव और आर्थिक मजबूरी के कारण कई बार लोग ऐसी जगहों पर पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद होती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की नियमित निगरानी की जाए।

स्वास्थ्य सेवा कोई सामान्य व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के जीवन से जुड़ा क्षेत्र है। इसलिए अस्पतालों के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और इलाज की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच जरूरी है। इससे अच्छे संस्थानों पर भी भरोसा बढ़ता है और गलत तरीके से संचालित केंद्रों पर रोक लगती है।

समस्तीपुर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच कराएं। जांच का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि जिले में लोगों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधा मिले।

जनता की शिकायतों को सुनना और उनका समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं स्वास्थ्य संस्थानों की भी जिम्मेदारी है कि वे सभी नियमों का पालन करते हुए मरीजों का विश्वास बनाए रखें। अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ही तय करेगी कि उठे सवालों की वास्तविक स्थिति क्या है।

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