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बूढ़ी गंडक के प्रसाद घाट पर गूंजा योग का संदेश, नदी संरक्षण और स्वस्थ जीवन का लिया संकल्प

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर समस्तीपुर के प्रसाद घाट पर जिला गंगा समिति द्वारा घाट पर योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों और युवाओं ने योग के साथ नदी संरक्षण का संकल्प लिया।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला गंगा समिति द्वारा बूढ़ी गंडक नदी के तट स्थित प्रसाद घाट पर विशेष “घाट पर योग” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लेकर योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के साथ-साथ नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी था।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से अपर समाहर्ता समस्तीपुर श्री ब्रजेश कुमार, नगर आयुक्त नगर निगम समस्तीपुर श्री ज्ञान प्रकाश, वरीय उप समाहर्ता श्री धर्मराज, जिला गंगा समिति के डीपीओ श्री नीरजेश कुमार, नोडल पदाधिकारी श्री अजय कुमार, नगर निगम के स्वच्छता पदाधिकारी श्री विवेक कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर अपर समाहर्ता श्री ब्रजेश कुमार ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। नियमित रूप से योग करने से व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें।

उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को नदियों और जलाशयों को स्वच्छ, सुरक्षित और अविरल बनाए रखने की सामूहिक शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। नदियां केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण और जीवन का आधार हैं।

कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक राजेंद्र कुमार सिंह उर्फ राजू ने उपस्थित लोगों को विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने ताड़ासन, भुजंगासन, वृक्षासन, शवासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कराते हुए इनके स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित योग से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, तनाव कम होता है और जीवनशैली बेहतर होती है।

बूढ़ी गंडक नदी के शांत वातावरण और खुले आसमान के नीचे आयोजित योग कार्यक्रम में युवाओं ने काफी उत्साह के साथ भाग लिया। नदी किनारे योग करने से लोगों को प्रकृति के करीब आने का अनुभव मिला। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जिला गंगा समिति के डीपीओ श्री नीरजेश कुमार ने कहा कि नदियों से जुड़ाव केवल भावनात्मक विषय नहीं बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि नदी किनारे योग करने से स्वच्छ हवा मिलती है और व्यक्ति प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल महसूस करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदियों को स्वच्छ रखने के लिए अपने स्तर से प्रयास करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को जिला गंगा समिति की ओर से शॉल, पाग और पौधा देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से पौधारोपण किया गया। पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया और अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की गई।

इस अवसर पर डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. रिंकी कुमारी सहित कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी युवाओं को योग एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में एनएसएस, एनसीसी और माय भारत से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में सुमित कुमार, राहुल कुमार, मो. अली, सुधांशु रंजन, अंशु, पवन सहित कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन अपनाने और नदी संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

जिला गंगा समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य, पर्यावरण और नदी संरक्षण के तीन महत्वपूर्ण संदेशों को एक साथ जोड़ने वाला साबित हुआ। बूढ़ी गंडक नदी के तट पर आयोजित योग कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर के लिए योग और स्वस्थ पर्यावरण के लिए स्वच्छ नदियां दोनों ही आवश्यक हैं।

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योग और नदी संरक्षण का सुंदर संगम

योग दिवस के अवसर पर बूढ़ी गंडक नदी के किनारे आयोजित घाट पर योग कार्यक्रम ने स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध को सामने रखा। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग लोगों को मानसिक शांति और शारीरिक मजबूती प्रदान करता है, वहीं नदियों का संरक्षण आने वाले भविष्य के लिए आवश्यक है।

नदी किनारे योग का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का संदेश है। जब लोग अपने स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण की चिंता करेंगे तभी समाज का संतुलित विकास संभव होगा। जिला गंगा समिति का यह प्रयास लोगों को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

युवाओं की भागीदारी यह बताती है कि नई पीढ़ी स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों विषयों को लेकर जागरूक हो रही है। आवश्यकता है कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं ताकि लोगों में योग, स्वच्छता और नदी संरक्षण की भावना मजबूत हो सके।

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