:
Breaking News

“71% मतदान पर गर्व, पर VVPAT पर्चियों ने उड़ाई प्रशासन की नींद”

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg


  मोहम्मद आलम, मुख्य संपादक, alamkikhabar.com

समस्तीपुर, सरायरंजन,जिस दिन समस्तीपुर में लगभग 71% मतदान दर्ज किया गया और प्रशासन खुले तौर पर इस उपलब्धि पर खुशियाँ बाँट रहा था, उसी दिन गुड़मा गांव की सड़क किनारे मिली VVPAT पर्चियों ने उस खुशी पर पानी फेर दिया। चुनावी उत्सव का स्वर घटते-घटते संदिग्धता के स्वर में बदल गया है।

यह इलाका महज़ कोई सीट नहीं है,यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहाँ से सरकार का कद्दावर मंत्री मैदान में हैं और पिछले चुनाव में जीत बहुत ही कम अंतर से दर्ज हुई थी। ऐसे संवेदनशील राजनीतिक माहौल में, डिस्पैच सेंटर से महज़ कुछ सौ मीटर की दूरी पर खुले में पड़ी पर्चियाँ किसी मामूली कोताही के रूप में नहीं टाली जा सकतीं। यह सीधे-सीधे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सवाल है।

प्रशासन ने प्रारम्भिक तौर पर कुछ कर्मियों को निलंबित किया और एफआईआर दर्ज करवा दी — यह आवश्यक पहला कदम है, परन्तु पर्याप्त नहीं। क्या डिस्पैच लॉग, मशीन-हैंडओवर रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और मॉक-पोल के नियमों का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया गया? जब प्रशासन डीएम-स्तर पर बधाइयाँ दे रहा हो और कतारों में खड़े मतदाता का उत्साह छपा रहा हो, तो उन वोटों की सुरक्षा की हर परत साफ़ होनी चाहिए — वरना 71% का आंकड़ा गौरव नहीं, प्रश्नचिन्ह बनकर रह जाएगा।

विपक्ष ने पहले से ही चुनाव आयोग पर संदेह जताया हुआ था; यह घटना उन आरोपों को और ठोस हवा देगी। इलाके के लोगों की चर्चाएँ तेज़ हैं—कुछ का कहना है कि मशीनों में छेड़छाड़ की संभावना पर शक होना स्वाभाविक है, तो कुछ यह पूछ रहे हैं कि क्या VVPAT का रिकॉर्ड सही तरह से रखा गया था। यदि मशीनों या कागज़ों का ट्रैकिंग टूटा है, तो यह सीधे वोटर के अधिकार पर चोट है।

चुनाव आयोग के पास अब केवल स्पष्टीकरण का समय नहीं है—उसके पास जवाबदेही दिखाने का वक्त है। पारदर्शिता के बिना निलंबन और बयान-बाज़ी ही सब कुछ बनकर रह जाएँगी। आयोग को चाहिए कि वह खुलकर डिस्पैच और हैंडलिंग के दस्तावेज सार्वजनिक करे, संबंधित CCTV फुटेज साझा करे और स्वतंत्र, सार्वजनिक जांच का रास्ता अपनाए ताकि संदेह की आग बुझ सके।

ग़ौरतलब है कि यह मामला केवल एक ग्रामीण सड़क पर मिली पर्चियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस चुनावी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो हर वोट की सुरक्षा का दावा करती है। अगर प्रशासन और आयोग वाकई पारदर्शिता चाहते हैं तो उन्हें जांच की हर परत जनता के सामने खोलनी होगी। वरना यह सवाल अब सिर्फ समस्तीपुर तक नहीं रहेगा — यह पूरे चुनावी सिस्टम और लोकतंत्र की साख पर खड़ा होगा।


 

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *