:
Breaking News

25 से 30 फिर से नीतीश" — पोस्टर के बहाने सत्ता के भीतर की सियासत का खुला संदेश

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण से पहले राजनीतिक गलियों में माहौल गरम है। पटना की दीवारों पर उभरा एक नया पोस्टर सबके बीच चर्चा का विषय बन गया है ,
25 से 30 फिर से नीतीश”।

जेडीयू का यह नारा सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए एक राजनीतिक संकेत है — कि चाहे समीकरण कुछ भी हों, मुख्यमंत्री की कुर्सी नीतीश कुमार से कोई नहीं छीन सकता।दीवारों से निकला सियासी संदेश जेडीयू ने यह पोस्टर उस वक्त लगाया है जब विपक्ष लगातार यह दावा कर रहा था कि चुनाव के बाद बीजेपी नीतीश कुमार को सीएम पद से किनारे कर सकती है। लेकिन पटना के प्रमुख चौराहों, सरकारी गलियों और मीडिया कॉरिडोर के आस-पास लटकते इस पोस्टर ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर अब भी “फैसला नीतीश का ही चलेगा।पोस्टर में नीतीश कुमार की तस्वीर बिहार के नक्शे के साथ है — जैसे यह बताने की कोशिश हो कि बिहार और नीतीश अब अलग नहीं हो सकते।यह वही स्लोगन है जो सत्ता के गलियारों में बैठे बीजेपी नेताओं को भी संदेश देता है कि अगर एनडीए को बिहार में टिकना है तो नीतीश ही एकमात्र विकल्प हैं।

अंदरखाने की खामोशी और बाहर की गूंज

दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी की ओर से अब तक इस पोस्टर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेडीयू का यह पॉलिटिकल मूव बीजेपी की “सीएम फेस स्ट्रेटेजी” पर एक तंज है।
जहां बीजेपी के अंदर कई नेता खुद को मुख्यमंत्री की संभावनाओं में देख रहे थे, वहीं जेडीयू ने इस पोस्टर के जरिए सीधा संदेश दिया है — फैसला दिल्ली में नहीं, पटना में होगा।

सोशल मीडिया पर ‘फिर से नीतीश’ की लहर

जेडीयू ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से भी इस मुहिम को हवा दी है।पोस्ट्स की लाइन लगी है,बिहार की जनता के आशीर्वाद और प्यार से, फिर से आ रही है नीतीश सरकार।बस अब चार दिनों का इंतजार.. फिर से नीतीश जी की सरकार।”स्वावलंबन की दिशा में बढ़ता बिहार, इसलिए 25 से 30 फिर से नीतीश सरकार।इन नारों के पीछे सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक रणनीति छिपी है — चुनाव से पहले जनता के दिमाग में यह धारणा बैठा दी जाए कि नीतीश की वापसी तय है।

राजनीति का असली खेल — सत्ता का संदेश

विश्लेषकों का कहना है कि जेडीयू का यह कदम दरअसल बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश है।
अगर चुनाव के बाद एनडीए बहुमत में आती भी है, तो नीतीश कुमार यह पहले ही साफ कर देना चाहते हैं कि सत्ता की कमान उन्हीं के हाथ में रहेगी।यह वही रणनीति है जो उन्होंने पहले भी कई बार अपनाई — जब-जब उन्हें किनारे करने की कोशिश हुई, तब-तब उन्होंने राजनीति की बिसात पलट दी।

यह सिर्फ पोस्टर नहीं, इशारा है

बिहार की सियासत में दीवारों के पोस्टर अक्सर बयान से ज़्यादा असरदार साबित होते हैं।
“25 से 30 फिर से नीतीश” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में गूंजता हुआ वह संदेश है जो बीजेपी के भीतर तक असर डाल रहा है।यह वही अंदाज़ है जिसमें नीतीश कुमार अपनी शांत लेकिन निर्णायक राजनीति से बार-बार बता देते हैं

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *