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समस्तीपुर के हसनपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: 5 वर्षीय बच्ची की जहर देकर हत्या, करेह नदी किनारे दफनाया गया शव

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समस्तीपुर के हसनपुर में 5 वर्षीय बच्ची की जहर देकर हत्या और शव को करेह नदी किनारे दफनाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू कर दी है।

हसनपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पारिवारिक विवाद के बीच 5 वर्षीय मासूम बच्ची रितिका कुमारी की जहर देकर हत्या करने और उसके शव को करेह नदी किनारे मिट्टी में दफनाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच के दौरान हसनपुर और सिंघिया थाना पुलिस के बीच सीमा विवाद के कारण कार्रवाई में थोड़ी देर जरूर हुई, लेकिन बाद में दोनों थानों की संयुक्त टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से जांच शुरू कर दी।

हसनपुर

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मां की शिकायत के बाद सामने आया पूरा मामला

पीड़ित बच्ची की मां पूजा देवी ने थाने में लिखित आवेदन देकर अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था और इसी विवाद के कारण उन्हें पहले मारपीट कर घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह अपने मायके चली गई थीं, लेकिन बच्चों को लेकर लगातार चिंता बनी रही। मां का आरोप है कि 19 जून की शाम उन्हें सूचना दी गई कि उनकी बेटी रितिका की हालत गंभीर है और उसे जहर दिया गया है। इसके अगले दिन जब वह ससुराल पहुंचीं तो बच्ची का शव घर के आंगन में पड़ा हुआ मिला, जिसके बाद उन्हें फिर से घर से भगा दिया गया।

शव को छुपाने का आरोप, करेह नदी किनारे दफनाने का दावा

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि हत्या के बाद बच्ची के शव को साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से करेह नदी के किनारे मिट्टी में दफना दिया गया। घटना की जानकारी मिलने पर जब मां ने खोजबीन शुरू की तो फुलहारा ढाला के पास नदी किनारे कुछ कपड़े मिले, जिन्हें देखकर उन्होंने अपनी बेटी के होने की पहचान की। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

करेह नदी

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन शुरुआती समय में दोनों थानों के बीच सीमा विवाद के कारण कार्रवाई कुछ देर तक रुकी रही। बाद में मामला सुलझने पर संयुक्त पुलिस टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया।

पुलिस ने बरामद किया मिट्टी में दबा शव

मंगलवार की सुबह हसनपुर और सिंघिया थाना पुलिस ने मजिस्ट्रेट और बीडीओ की मौजूदगी में संयुक्त रूप से करेह नदी किनारे तलाशी अभियान चलाया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद मिट्टी में दबे हुए शव को बरामद किया गया। शव मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल फैल गया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया।

परिवार के कई सदस्यों पर गंभीर आरोप

मृतका की मां पूजा देवी ने अपने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाते हुए बताया है कि उनकी जेठानी गीता देवी सहित परिवार के कई सदस्यों ने मिलकर साजिश के तहत उनकी बेटी को जहर दिया और उसकी हत्या कर दी। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था और इसी कारण उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा था।

पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर सुनील कांत ने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और सभी पहलुओं पर पुलिस काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल सभी आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इलाके में आक्रोश और मातम का माहौल

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे हसनपुर और आसपास के इलाकों में गहरा आक्रोश और शोक का माहौल है। लोग मासूम बच्ची के साथ हुई इस कथित क्रूरता से स्तब्ध हैं और प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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हसनपुर की यह घटना समाज के भीतर छिपे पारिवारिक तनाव और हिंसा की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली त्रासदी है। एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची का इस तरह कथित रूप से जहर देकर मारा जाना और उसके शव को छुपाने का प्रयास यह दिखाता है कि पारिवारिक विवाद किस हद तक खतरनाक रूप ले सकते हैं।

ऐसे मामलों में सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होती है कि वे बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच करें और सच्चाई को सामने लाएं। साथ ही समाज के लिए भी यह एक चेतावनी है कि घरेलू विवादों को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से सुलझाया जाए, न कि हिंसा के रास्ते पर जाकर।

यह घटना हर परिवार के लिए एक गंभीर संदेश छोड़ती है कि आपसी विवादों का असर सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है, जो पूरी तरह निर्दोष होते हैं।

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