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बिहार में भ्रष्टाचार पर EOU का शिकंजा, अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के पटना से दिल्ली तक कई ठिकानों पर रेड

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बिहार आर्थिक अपराध इकाई ने भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में पटना, भागलपुर, नोएडा और दिल्ली समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में बुधवार को ईओयू ने भवन निर्माण विभाग में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच एजेंसी ने पटना, भागलपुर, नोएडा और नई दिल्ली समेत कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के अनुसार, अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई थाना में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को ऐसी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक प्रतीत हो रहे हैं। इसी आधार पर न्यायालय से अनुमति प्राप्त करने के बाद ईओयू की अलग-अलग टीमों ने बुधवार सुबह से कार्रवाई शुरू की।

ईओयू की टीमों ने एक साथ कई शहरों में पहुंचकर संबंधित परिसरों की तलाशी ली। पटना स्थित आवास और कार्यालय से जुड़े स्थानों के अलावा भागलपुर में स्थित आवास, नोएडा के फ्लैट और दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में मौजूद संपत्ति को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया।

बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी को प्रारंभिक छानबीन में करीब 3.89 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति के बारे में जानकारी मिली है, जिसका हिसाब अधिकारी की ज्ञात आय से मेल नहीं खा रहा है। ईओयू इस संपत्ति को प्रथम दृष्टया आय से अधिक मानकर जांच आगे बढ़ा रही है।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों की टीम संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, निवेश संबंधी रिकॉर्ड, जमीन और फ्लैट से जुड़े कागजात समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां किस माध्यम से अर्जित की गईं और इनमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की भूमिका है या नहीं।

आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई सुबह से ही अलग-अलग स्थानों पर जारी रही। अधिकारियों की टीमों ने सभी परिसरों में पहुंचकर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जाएगा और इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में पिछले कुछ समय से जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। सरकारी पदों पर रहते हुए अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईओयू अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले आय, संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत पवन कुमार के मामले में भी जांच शुरू की गई है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रूप से अर्जित संपत्तियों में कौन-कौन से स्रोत शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग लेन-देन, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

इस छापेमारी के बाद भवन निर्माण विभाग और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

ईओयू की टीम तलाशी अभियान पूरा करने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की रिपोर्ट तैयार करेगी। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस मामले में आने वाले दिनों में और भी जानकारी सामने आने की संभावना है।

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सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आय से अधिक संपत्ति के मामले केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था में जनता के भरोसे से भी जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी होती है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ईओयू की कार्रवाई के बाद अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि सामने आई संपत्तियां वैध आय के स्रोतों से अर्जित की गई हैं या नहीं। जांच एजेंसी द्वारा दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

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